डेस्क : अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सरकारी सहायता के वितरण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। एक ही परिवार के सदस्यों को करीब 23 लाख रुपये की सहायता दिए जाने के मामले में अदालत ने प्रथम दृष्टया गड़बड़ी की आशंका जताई है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे उत्तर प्रदेश में इस तरह के मामलों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
अदालत के सामने सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एक ही परिवार को अलग-अलग मामलों के आधार पर अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत बड़ी धनराशि का भुगतान किया गया। इतनी बड़ी राशि एक ही परिवार को दिए जाने पर अदालत ने प्रक्रिया और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए।
पूरे उत्तर प्रदेश में जांच के आदेश
हाईकोर्ट ने मामले को केवल एक परिवार तक सीमित नहीं माना। अदालत ने प्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत दी गई आर्थिक सहायता की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कहीं नियमों का दुरुपयोग कर अपात्र लोगों को सरकारी धन तो नहीं बांटा गया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं और मुआवजे की राशि का वितरण निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर होना चाहिए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है।
सरकारी धन के दुरुपयोग पर चिंता
मामले ने सरकारी सहायता योजनाओं में निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। अदालत के निर्देश के बाद अब प्रदेशभर में ऐसे मामलों की जांच होने की संभावना है। इससे यह सामने आ सकता है कि अधिनियम के तहत कितने मामलों में वास्तविक पीड़ितों को सहायता मिली और कहीं किसी स्तर पर फर्जीवाड़ा या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।








