डेस्क : संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में 22 अक्टूबर को आयोजित भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के नौवें वार्षिक कार्यक्रम में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भारत के विकास सहयोग और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रयासों की सराहना की। ग्लोबल साउथ के देशों के राजनयिकों ने कहा कि भारत की पहल स्थानीय जरूरतों, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और समानता पर आधारित विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कार्यक्रम में लाओस, श्रीलंका, तंजानिया, माइक्रोनेशिया, मोल्दोवा, मोरक्को, सेंट लूसिया, क्यूबा और मोजाम्बिक सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
शिक्षा और बुनियादी ढांचे में भारत के सहयोग की सराहना
संयुक्त राष्ट्र में तुवालु के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत तापुगाओ फालेफोउ ने कहा कि भारत की सहायता से सैकड़ों स्कूलों और संस्थानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना स्थानीय आवश्यकताओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास का उदाहरण है। तुवालु ने भारत सरकार की विकास सहायता के प्रति आभार व्यक्त किया।
सेंट लूसिया की स्थायी प्रतिनिधि राजदूत मेनिसा रैमबली ने कहा कि भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष विकासशील देशों में आर्थिक और सामाजिक प्रगति के साथ-साथ क्षमता निर्माण को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक और सामाजिक विकास की विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे देशों के लिए इस कोष का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
तंजानिया, तिमोर-लेस्ते और क्यूबा ने भी जताया आभार
संयुक्त राष्ट्र में तंजानिया के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टोगोलानी एड्रिस मावुरा ने सतत विकास के लिए भारत और भारत-संयुक्त राष्ट्र कोष के निरंतर सहयोग के प्रति आभार जताया।
तिमोर-लेस्ते के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत डायोनिसियो दा कोस्टा बाबो सोरेस ने कहा कि यह कोष विकासशील देशों के बीच एकजुटता का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है। उन्होंने कहा कि तिमोर-लेस्ते को इस सहयोग का प्रत्यक्ष लाभ मिला है। उनके अनुसार, दक्षिण-दक्षिण सहयोग साझा प्रतिबद्धताओं को आम लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए सार्थक अवसरों में बदलने में सक्षम है।
क्यूबा के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अर्नेस्टो सोबेरोन गुजमान ने कहा कि असमानताओं से भरी मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में भारत-संयुक्त राष्ट्र कोष जैसे सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक है। उन्होंने भारत के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि समानता, आपसी सम्मान और साझा आकांक्षाओं पर आधारित साझेदारी ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज को मजबूत कर सकती है।
मोजाम्बिक के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत डोमिंगोस एस्तेवाओ फर्नांडिस ने भी कोष की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, समानता और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत पर आधारित दक्षिण-दक्षिण सहयोग का ठोस उदाहरण है। उन्होंने इसे उत्तर-दक्षिण सहयोग का पूरक बताते हुए भारत की भूमिका की सराहना की।
2017 में हुई थी कोष की स्थापना
भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष की स्थापना वर्ष 2017 में की गई थी। 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का यह कोष भारत सरकार के नेतृत्व और वित्तीय सहयोग से संचालित होता है तथा संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के साथ मिलकर विकास परियोजनाओं को लागू करता है।
इस कोष का उद्देश्य विकासशील देशों में उनकी अपनी जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप सतत विकास परियोजनाओं को समर्थन देना है। इसमें सबसे कम विकसित देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियां संबंधित देशों की सरकारों के साथ मिलकर इन परियोजनाओं को लागू करती हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाओं ने यह रेखांकित किया कि भारत का विकास सहयोग केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, बुनियादी ढांचे, क्षमता निर्माण और विकासशील देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने में भी योगदान दे रहा है।









