डेस्क : पश्चिम एशिया के जॉर्डन में शुक्रवार को एक चर्च में अंतिम संस्कार के दौरान बंदूकधारियों ने गोलीबारी कर दी। इस हमले में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 लोग घायल हुए हैं। घायलों का अस्पतालों में उपचार जारी है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने हमलावरों की तलाश तेज कर दी है। अधिकारियों ने इस घटना को चरमपंथियों द्वारा किया गया आतंकवादी हमला बताया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना जॉर्डन के कराक प्रांत स्थित हमूद चर्च में हुई। उस समय चर्च में अंतिम संस्कार के लिए लोग एकत्रित हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों ने कई मिनट तक गोलीबारी की, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
हमलावरों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां
जॉर्डन के सार्वजनिक सुरक्षा निदेशालय के प्रमुख मेजर जनरल अब्दुल्ला अल-मायताह ने सात लोगों की मौत की पुष्टि की। देश के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, हमले में 40 लोग घायल हुए हैं।
जॉर्डन के गृह मंत्री माजेन अल-फरायह ने हमले के पीछे चरमपंथियों का हाथ होने की बात कही। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हमलावरों के संबंध देश के भीतर या बाहर सक्रिय किसी ज्ञात संगठन से हैं। घटना की जिम्मेदारी तत्काल किसी संगठन ने नहीं ली है।
जॉर्डन के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित सुरक्षा कैमरे के फुटेज में तीन लोगों को चर्च के बाहर गोलीबारी करते और फिर प्रवेश द्वार की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया है।
किंग अब्दुल्ला ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
हमले के बाद जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने कराक का दौरा किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि देश को बांटने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री जाफर हसन ने भी हमले की निंदा करते हुए इसे चरमपंथी विचारधारा का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि जॉर्डन के समाज को इस तरह की विचारधारा के रास्ते पर नहीं जाने दिया जाएगा।
जॉर्डन में इस तरह के हमले दुर्लभ
जॉर्डन पश्चिम एशिया का अपेक्षाकृत स्थिर देश माना जाता है और यहां धार्मिक स्थलों पर इस तरह की हिंसक घटनाएं दुर्लभ हैं। देश में ईसाई समुदाय अल्पसंख्यक है। कराक क्षेत्र में भी ईसाई समुदाय की उल्लेखनीय आबादी है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी घटना की निंदा की और कहा कि आम नागरिकों तथा धार्मिक स्थलों पर हमले स्वीकार्य नहीं हैं।
फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों की पहचान और उनके संभावित नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही हमले से जुड़े अन्य पहलुओं की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।









