भारत की आर्थिक ताकत पर दुनिया की मुहर, 35 साल बाद मिली ‘ए-’ रेटिंग

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नई दिल्ली : भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और सकारात्मक संकेत मिला है। जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दिया है। एजेंसी ने भारत की रेटिंग के साथ स्थिर परिदृश्य (Stable Outlook) भी बरकरार रखा है।

JCR के मुताबिक भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, वित्तीय क्षेत्र में सुधार और आर्थिक विकास को गति देने वाली नीतियों के कारण रेटिंग में यह सुधार किया गया है। एजेंसी का अनुमान है कि भारत वित्त वर्ष 2026-27 में भी 6 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि बनाए रख सकता है।

35 साल बाद ‘ए’ श्रेणी में वापसी

भारत को तीन दशक से अधिक समय बाद फिर से ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग मिली है। 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन.के. सिंह ने इसे भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, संरचनात्मक सुधारों और केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर आर्थिक समन्वय की मान्यता बताया है।

भारत को इससे पहले 1988 में मूडीज की ओर से ‘ए2’ रेटिंग मिली थी। हालांकि 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के बाद भारत की यह रेटिंग समाप्त हो गई थी।

मजबूत खपत और निवेश बना आधार

JCR ने भारत की अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन में निजी खपत और सार्वजनिक निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका बताई है। एजेंसी के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था ने हाल के वर्षों में करीब 7 प्रतिशत के आसपास मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.7 प्रतिशत रही।

एजेंसी ने डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के विस्तार, वस्तु एवं सेवा कर (GST) जैसे सुधारों और आर्थिक नीतियों को भी भारत की आर्थिक नींव मजबूत करने वाला बताया है। बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति में सुधार भी रेटिंग बढ़ाने के प्रमुख कारणों में शामिल है।

आम लोगों और कारोबार को क्या फायदा?

क्रेडिट रेटिंग में सुधार का असर आम लोगों पर तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है, लेकिन लंबे समय में इसका आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। बेहतर संप्रभु रेटिंग से भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से कर्ज जुटाने की लागत कम होने की संभावना रहती है।

इसका सकारात्मक असर निवेश, कारोबार विस्तार और रोजगार के अवसरों पर पड़ सकता है। भविष्य में वित्तीय परिस्थितियों के अनुकूल रहने पर होम लोन, वाहन ऋण और कारोबारी कर्ज की ब्याज दरों पर भी इसका अप्रत्यक्ष सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद की जा सकती है।

वित्तीय चुनौतियां अब भी बरकरार

हालांकि रेटिंग बढ़ाते समय JCR ने भारत के सामने मौजूद कुछ चुनौतियों का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार केंद्र और राज्यों के बीच जटिल वित्तीय संबंध, ऊंचा सार्वजनिक ऋण और ब्याज भुगतान का बोझ भारत के लिए प्रमुख वित्तीय चुनौतियां हैं।

JCR ने यह भी कहा है कि भविष्य में राजकोषीय घाटे, सार्वजनिक ऋण, भुगतान संतुलन और आर्थिक परिस्थितियों में बड़े बदलाव होने पर भारत की रेटिंग में फिर परिवर्तन किया जा सकता है।

विदेशी निवेश के लिए सकारात्मक संकेत

रेटिंग में सुधार को भारत के लिए विदेशी निवेश के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऊंची क्रेडिट रेटिंग अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच किसी देश की आर्थिक स्थिरता और कर्ज चुकाने की क्षमता को लेकर भरोसा बढ़ा सकती है। इससे भारत में दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।