जयपुर : अणुविभा केन्द्र स्थित महाप्रज्ञ सभागार में शुक्रवार को तेरापंथ महिला मंडल (शहर) की ओर से सामूहिक आयंबिल तप आराधना का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बहनों एवं भाइयों ने आयंबिल तप की साधना की।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने आयंबिल तप की महिमा बताते हुए कहा कि तप आत्मशुद्धि का सशक्त माध्यम है और इससे कर्मों की महानिर्जरा होती है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में आयंबिल तप की महत्ता बताते हुए उल्लेख मिलता है कि आयंबिल तप करने वाला अपने पूर्व संचित 100 करोड़ वर्ष के अशुभ कर्मों का क्षय कर सकता है।
मुनिश्री ने भगवान श्रीकृष्ण की द्वारिका का प्रसंग बताते हुए कहा कि वासुदेव श्रीकृष्ण की देवनगर जैसी द्वारिका नशामुक्त और आयंबिल तप की साधना से युक्त होने के कारण सुरक्षित थी। उन्होंने कहा कि संयम, तप और आध्यात्मिक अनुशासन व्यक्ति के जीवन के साथ-साथ समाज को भी शक्ति प्रदान करते हैं।
उन्होंने बताया कि जैन परंपरा में सर्वाधिक आयंबिल तप करने वाली साधिकाओं में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की सुपुत्री सुंदरी का विशेष स्थान है। उन्होंने अवसर्पिणी काल के तीसरे आरे के अंत में लगातार 60 हजार वर्ष तक आयंबिल तप करने की साधना की थी।
इस अवसर पर मुनिश्री संभव कुमार जी महाराज ने कहा कि तप की साधना सभी धर्मों में मान्य रही है, लेकिन जैन धर्म में तपस्या को विशेष महत्व दिया गया है। जैन परंपरा में विभिन्न प्रकार की तपस्याओं का उल्लेख मिलता है, जिनमें आयंबिल तप की विशेष महत्ता है। उन्होंने कहा कि आयंबिल तप केवल आत्मशुद्धि का माध्यम ही नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने में भी सहायक है।
कार्यक्रम के दौरान बारह व्रत कार्यशाला, तत्त्वज्ञान तथा ‘भरत मुक्ति’ गेय व्याख्यान जैसे आध्यात्मिक उपक्रम भी आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को संयम, तप और आध्यात्मिक जीवन के महत्व से जोड़ा गया।
तेरापंथ महिला मंडल (शहर) की अध्यक्षा श्रीमती कौशल्या जी जैन एवं मंत्री श्रीमती पायल जी जैन ने बताया कि अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशन में स्थानीय मंडल द्वारा यह आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि आयंबिल तप का यह सामूहिक आयोजन देशभर में एक साथ किया गया, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को तप, संयम और आध्यात्मिक साधना से जोड़ना है।








