डेस्क : भारत के स्मार्टफोन बाजार में वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। जुलाई से सितंबर के दौरान देश में स्मार्टफोन शिपमेंट में सालाना आधार पर 20 फीसदी की कमी आई है। सबसे ज्यादा असर बजट स्मार्टफोन श्रेणी पर पड़ा है, जहां 20 हजार रुपये से कम कीमत वाले मोबाइल फोन की शिपमेंट में 47 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार अनुसंधान कंपनी काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, मोबाइल फोन की बढ़ती कीमतों, मेमोरी चिप की लागत में वृद्धि और ग्राहकों की कमजोर मांग ने स्मार्टफोन कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में मांग घटने के कारण कंपनियों को अपनी बिक्री और स्टॉक की रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है।
महंगे फोन ने घटाई ग्राहकों की खरीदारी
स्मार्टफोन की लागत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर बजट श्रेणी के ग्राहकों पर दिखाई दे रहा है। इस वर्ग में बड़ी संख्या में ऐसे ग्राहक शामिल हैं, जो सीमित बजट में बेहतर फीचर्स वाला फोन खरीदना चाहते हैं। कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कई ग्राहक नया फोन खरीदने के बजाय पुराने मोबाइल का इस्तेमाल जारी रख रहे हैं। वहीं, कुछ ग्राहकों ने फोन बदलने की योजना भी टाल दी है।
मेमोरी चिप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों की बढ़ती लागत को भी बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है। उत्पादन खर्च बढ़ने से कंपनियों के सामने कीमतों और मुनाफे के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
सैमसंग पहले स्थान पर पहुंची
बाजार में गिरावट के बावजूद सैमसंग ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए भारतीय स्मार्टफोन बाजार में पहला स्थान हासिल किया है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, तीसरी तिमाही में सैमसंग की बाजार हिस्सेदारी 17 फीसदी रही। वहीं, वीवो 16 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रही।
ओप्पो की बाजार हिस्सेदारी 12 फीसदी दर्ज की गई, जबकि शाओमी और पोको की संयुक्त हिस्सेदारी भी 12 फीसदी रही। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कुल बाजार में गिरावट के बीच कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
पूरे साल बाजार में गिरावट का अनुमान
अनुमान है कि वर्ष 2026 के दौरान भारत में स्मार्टफोन बाजार में सालाना आधार पर लगभग 13 फीसदी की गिरावट आ सकती है। यदि कीमतों पर दबाव और ग्राहकों की कमजोर मांग जारी रहती है, तो मोबाइल कंपनियों के लिए बिक्री बढ़ाना चुनौतीपूर्ण बना रह सकता है।
बाजार की स्थिति को देखते हुए कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए छूट, एक्सचेंज ऑफर और आसान किस्तों जैसी योजनाओं पर जोर दे सकती हैं। हालांकि, इन योजनाओं का बिक्री पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।
फिलहाल भारतीय स्मार्टफोन बाजार बढ़ती लागत और घटती मांग की दोहरी चुनौती से गुजर रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर किफायती मोबाइल फोन खरीदने वाले ग्राहकों और इस श्रेणी में कारोबार करने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है।









