भारत ने भी अमेरिका को दी चेतावनी, 100 फीसदी टैरिफ वाले बिल पर जताई कड़ी आपत्ति

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नई दिल्ली :  रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने से जुड़ा विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पारित हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद भारत ने स्पष्ट किया है कि देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों को कड़ा करने वाले इस विधेयक को 262 के मुकाबले 159 मतों से मंजूरी दी। प्रस्ताव में रूस से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान शामिल है। इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को संबंधित देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।

भारत पर भी इस प्रस्ताव का असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। हालांकि, विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। आगे की प्रक्रिया और अमेरिकी प्रशासन के निर्णय के बाद ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश अपनी विशाल आबादी और अर्थव्यवस्था की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि भारत इस मुद्दे से जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहा है।

अमेरिका की ओर से रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी ऊर्जा आय को सीमित करने के उद्देश्य से प्रतिबंधों को और कड़ा करने की कोशिश की जा रही है। नए प्रस्ताव में रूस के अलावा ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को मजबूत करने तथा प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रूसी जहाजों के नेटवर्क पर कार्रवाई के प्रावधान भी शामिल हैं।

भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उसकी ऊर्जा खरीद देश की जरूरतों, राष्ट्रीय हित और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के आधार पर होती है। ऐसे में अमेरिकी विधेयक के आगे बढ़ने से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर आने वाले समय में नई कूटनीतिक और आर्थिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं।