डेस्क : पंजाब में किसानों और कृषि मजदूरों के रेल रोको आंदोलन ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। किसान मजदूर मोर्चा के आह्वान पर गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर रेलवे ट्रैक पर धरना दिया। आंदोलन के कारण अमृतसर-दिल्ली समेत कई रेल मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ और कुछ ट्रेनों के मार्ग में बदलाव करना पड़ा।
किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर पंजाब सरकार को 17 सितंबर दोपहर 12 बजे तक का समय दिया था। मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए संगठनों ने रेल रोको आंदोलन शुरू किया। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत के बावजूद उनकी प्रमुख मांगों का समाधान नहीं हुआ है।
अमृतसर के जंडियाला गुरु के निकट देवीदासपुरा में किसानों ने अमृतसर-दिल्ली रेलवे ट्रैक पर धरना दिया। इसके अलावा फिरोजपुर-मोगा-लुधियाना रेल मार्ग समेत कई स्थानों पर भी प्रदर्शन किया गया। मल्लांवाला, गुरदासपुर, मोगा और संगरूर में भी किसानों के रेलवे ट्रैक पर बैठने की खबर है।
किसानों की प्रमुख मांगों में कर्जमाफी और विभिन्न फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद शामिल है। बासमती, मक्का, मूंग, सरसों और आलू समेत कई फसलों के लिए एमएसपी पर खरीद की मांग उठाई गई है। किसान संगठन कृषि मजदूरों से जुड़े मुद्दों के समाधान की भी मांग कर रहे हैं।
सरकार और किसानों के बीच बढ़ी दूरी
पंजाब में किसान मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। इससे पहले भी किसानों के प्रदर्शन और कृषि बिजली आपूर्ति को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार को विपक्षी दलों की आलोचना का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस ने हाल में बिजली संकट को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था और किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलने का आरोप लगाया था।
किसानों के मौजूदा आंदोलन के बीच राज्य सरकार के सामने मांगों पर बातचीत और रेल यातायात को सामान्य बनाए रखने की चुनौती है। वहीं, किसान संगठन अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
पंजाब की राजनीति में किसान मुद्दों का महत्व देखते हुए यह आंदोलन सरकार और किसान संगठनों के बीच संबंधों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, इसके राजनीतिक प्रभाव का आकलन आने वाले समय में ही किया जा सकेगा।








