भारतीय ज्वेलरी को ग्लोबल ब्रांड बनाने पर जोर, नए बाजारों में विस्तार की तैयारी

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डेस्क : भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी क्षेत्र की वैश्विक बाजार में मजबूत मौजूदगी है, लेकिन हीरा और आभूषण कारोबार से आगे बढ़कर अन्य उत्पाद श्रेणियों में विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक डॉ. प्रवाकर साहू ने कहा कि बेहतर डिजाइन, अधिक वैल्यू एडिशन, मजबूत ब्रांडिंग और नए बाजारों में विस्तार के जरिए भारत वैश्विक स्तर पर अपनी हिस्सेदारी को और बढ़ा सकता है।

जेम्स एंड ज्वेलरी कॉन्फ्रेंस 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए साहू ने कहा कि कच्चे सोने को छोड़कर वैश्विक जेम्स एंड ज्वेलरी बाजार में भारत की हिस्सेदारी करीब 7.8 प्रतिशत है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में इस क्षेत्र में भारत का निर्यात 29.5 अरब डॉलर रहा, जबकि वैश्विक बाजार का आकार 378.1 अरब डॉलर था।

साहू ने कहा कि भारत ने हीरे और आभूषणों के क्षेत्र में मजबूत क्षमता विकसित की है, लेकिन अब उद्योग को अधिक वैल्यू एडिशन, बेहतर डिजाइन, ब्रांड निर्माण और बाजारों के विविधीकरण पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के साथ पारंपरिक भारतीय कारीगरी को भी संरक्षित रखना जरूरी है।

उन्होंने उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्र में बिखराव कम करने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, वित्त तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने और कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है। बदलती वैश्विक व्यापार परिस्थितियों को देखते हुए निर्यात और आयात बाजारों में विविधता लाना भी महत्वपूर्ण है।

साहू ने कहा कि कई ऐसे देशों ने, जिनके पास प्राकृतिक संसाधनों की बड़ी उपलब्धता नहीं है, बेहतर बुनियादी ढांचे, प्रोसेसिंग क्षमता और बाजार विकास के जरिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ज्वेलरी उद्योग खड़े किए हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में भी भारत के लिए डिजाइन, नवाचार, ब्रांडिंग, वित्तीय पहुंच और बाजार विविधीकरण को महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया है।

सीआईआई जेम्स एंड ज्वेलरी टास्कफोर्स के चेयरमैन और जीआरटी ग्रुप के प्रबंध निदेशक जीआर आनंद अनंतपद्मनाभन ने उद्योग, सरकार और उपभोक्ताओं से मिलकर भारतीय आभूषण उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई तक ले जाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

सीआईआई जेम्स एंड ज्वेलरी टास्कफोर्स के सह-अध्यक्ष और नोवेल ज्वेल्स के सीईओ संदीप कोहली ने कहा कि भारत के अगले विकास चरण में केवल उत्पादन का विस्तार पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने डिजाइन, वैल्यू एडिशन और वैश्विक ब्रांड निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।

डी बीयर्स ग्रुप की वरिष्ठ उपाध्यक्ष एम्मा वेड-स्मिथ ओबीई ने प्राकृतिक और लैब-ग्रोवन हीरों के संबंध में पारदर्शी और स्पष्ट जानकारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर मानक, तकनीक और ट्रेसेबिलिटी उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने के साथ भारतीय हीरा उद्योग की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

नीति आयोग के अनुसार, भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात में अभी भी हीरे और सोने के आभूषणों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में अन्य उत्पाद श्रेणियों और नए वैश्विक बाजारों में विस्तार को क्षेत्र की अगली विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।