डेस्क : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल अब केवल मौजूदा बीमारियों की पहचान तक सीमित नहीं रह गया है। वैज्ञानिक एआई की मदद से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य भविष्य में किस दिशा में बढ़ रहा है और उसे किन बीमारियों का खतरा हो सकता है। Longevitty.ai की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य क्षेत्र में बीमारी की पहचान से आगे बढ़कर उसके संभावित जोखिम का पूर्वानुमान लगाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिक अब किसी एक मेडिकल टेस्ट के नतीजे पर निर्भर रहने के बजाय समय के साथ शरीर में होने वाले बदलावों का अध्ययन कर रहे हैं। इसके तहत रक्त में मौजूद प्रोटीन, जैविक उम्र और शरीर के अलग-अलग अंगों की स्थिति जैसे संकेतकों का विश्लेषण किया जा रहा है।
प्रोटीन से उम्र और बीमारी के जोखिम का अनुमान
रिपोर्ट में 2024 में हुए एक शोध का उल्लेख किया गया है, जिसमें यूके बायोबैंक के 45,441 लोगों के प्रोटीन संबंधी आंकड़ों का एआई की मदद से अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि 204 प्रोटीन को एक साथ देखकर किसी व्यक्ति की उम्र का अनुमान लगाया जा सकता है। जिन लोगों के प्रोटीन के आधार पर अनुमानित जैविक उम्र उनकी वास्तविक उम्र से अधिक थी, उनमें हृदय, किडनी और फेफड़ों की बीमारी, मधुमेह तथा कैंसर समेत 18 प्रमुख बीमारियों का जोखिम अधिक पाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में भी बीमारी के शुरुआती जोखिम की पहचान एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, 11.52 करोड़ अमेरिकी वयस्क प्रीडायबिटीज से प्रभावित हैं और इनमें से करीब 80 प्रतिशत लोगों को इसकी जानकारी नहीं है।
अलग-अलग अंगों की ‘उम्र’ का भी अध्ययन
स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अन्य अध्ययन में शरीर के अलग-अलग अंगों का अलग-अलग विश्लेषण किया गया। करीब 44,498 लोगों के आंकड़ों के अध्ययन में पाया गया कि मस्तिष्क और प्रतिरक्षा प्रणाली किसी व्यक्ति की उम्र और स्वस्थ जीवन की संभावित अवधि का अनुमान लगाने वाले महत्वपूर्ण संकेतकों में शामिल हैं।
शोध में यह भी सामने आया कि लोगों की जीवनशैली और उनके द्वारा ली जाने वाली दवाओं के आधार पर उनके अंगों की जैविक उम्र में बदलाव हो सकता है।
1,000 से अधिक बीमारियों का अनुमान लगाने वाला मॉडल
एआई आधारित स्वास्थ्य अनुसंधान में एक और महत्वपूर्ण विकास Delphi-2M मॉडल के रूप में सामने आया है। यूरोप के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह मॉडल भविष्य में होने वाली संभावित बीमारियों का अनुमान लगाने के लिए तैयार किया गया है।
यह मॉडल उसी तरह काम करने की कोशिश करता है, जैसे मोबाइल फोन का की-बोर्ड अगले शब्द का अनुमान लगाता है। अंतर यह है कि यहां अगले शब्द के बजाय किसी व्यक्ति में अगली संभावित बीमारी और उसके सामने आने के संभावित समय का अनुमान लगाने का प्रयास किया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, Delphi-2M को ब्रिटेन के करीब चार लाख लोगों के आंकड़ों पर प्रशिक्षित किया गया और बाद में डेनमार्क के 19 लाख लोगों के आंकड़ों पर इसका परीक्षण किया गया। मॉडल में 1,000 से अधिक बीमारियों का अनुमान लगाने की क्षमता बताई गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसका प्रदर्शन उन उपकरणों के लगभग समान रहा, जो एक समय में एक ही बीमारी के जोखिम का आकलन करने के लिए बनाए गए हैं।
डॉक्टरों के बीच भी बढ़ रहा एआई का इस्तेमाल
Longevitty.ai के संस्थापक और सीईओ मैक्स चोपड़ा के अनुसार, एआई अब चिकित्सा क्षेत्र के रोजमर्रा के काम का हिस्सा बनता जा रहा है। उनके मुताबिक, इस साल किए गए एक सर्वे में 81 प्रतिशत डॉक्टरों ने अपने काम में एआई के इस्तेमाल की बात कही, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 38 प्रतिशत था।
हालांकि, डॉक्टरों ने यह चिंता भी जताई कि मरीज बिना चिकित्सकीय मार्गदर्शन के एआई का इस्तेमाल कर सकते हैं। चोपड़ा ने कहा कि भविष्य में एक एआई प्रणाली किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य इतिहास और रक्त संबंधी आंकड़ों को एक साथ देखकर स्वास्थ्य की अधिक व्यापक तस्वीर पेश कर सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रक्त प्रोटीन, शरीर के अलग-अलग अंगों और स्वास्थ्य रिकॉर्ड के विश्लेषण के जरिए बीमारी और उम्र बढ़ने से जुड़े जोखिमों का अनुमान लगाने की दिशा में शोध तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में बीमारी सामने आने के बाद इलाज करने के साथ-साथ संभावित जोखिमों की पहले से पहचान करने पर भी जोर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।








