डेस्क : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय शांतिप्रिय होते हैं और दूसरे देशों में समाज की शांति भंग करने या तोड़फोड़ करने में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने कहा कि विदेशों में भारतीयों को मिलने वाला सम्मान उनके व्यवहार और सामाजिक योगदान को दर्शाता है।
गोयल ने सोमवार को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब फ्रांस, इटली सहित यूरोप के कई देशों में महंगाई, वेतन और सार्वजनिक सेवाओं जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में कुछ स्थानों पर हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं।
विदेशों में भारतीयों का सम्मान उनकी पहचान
पीयूष गोयल ने कहा कि दूसरे देशों में किसी समुदाय को कितना सम्मान मिलता है, यह इस बात से भी तय होता है कि वहां के लोग उसके सदस्यों को किस नजर से देखते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय को विदेशों में स्वागत और सम्मान मिलता है, क्योंकि भारतीय आम तौर पर कानून का पालन करते हैं, अपने परिवारों की देखभाल करते हैं और समाज के साथ मिलकर रहते हैं।
उन्होंने यूरोप के कुछ हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीयों की पहचान शांतिप्रिय समुदाय के रूप में बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ अपवाद हो सकते हैं, जो उनके नियंत्रण से बाहर हैं।
भारतीय युवाओं और बच्चों की मदद करने की अपील
गोयल ने विदेशों में स्थापित भारतीय समुदाय के लोगों से भारत के बच्चों और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले अनुभवी भारतीय बच्चों को मेंटरशिप, डिजिटल प्रशिक्षण और करियर संबंधी मार्गदर्शन दे सकते हैं।
इस तरह के सहयोग से बच्चों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और भविष्य के लिए बेहतर अवसर हासिल करने में मदद मिल सकती है। विदेशों में काम कर रहे भारतीय विशेषज्ञ अपने अनुभव और ज्ञान के माध्यम से देश की नई पीढ़ी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारत-जर्मनी संबंधों को मजबूत करने पर जोर
पीयूष गोयल 22 से 24 अक्टूबर तक जर्मनी के आधिकारिक दौरे पर थे। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और जर्मनी के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करना था। इस दौरान उन्होंने जर्मन अधिकारियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत की।
भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने में विदेशों में रहने वाले भारतीयों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्क, निवेश और आपसी संबंधों को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।
यूरोप में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
यूरोप के कई देशों में बढ़ती जीवन लागत, वेतन, सरकारी नीतियों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। फ्रांस में हालिया प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं तथा तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं।
हालांकि, सभी प्रदर्शन हिंसक नहीं रहे हैं। कई जगहों पर लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं। ऐसे माहौल में पीयूष गोयल का बयान विदेशों में भारतीय समुदाय की छवि, सामाजिक व्यवहार और भारत के साथ उसके संबंधों को लेकर चर्चा में आया है।









