जयपुर : राजधानी जयपुर के मालवीय नगर स्थित अणुविभा केंद्र में रविवार को आध्यात्मिक उल्लास और धर्ममय वातावरण के बीच मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में आयोजित भव्य योगक्षेम रैली में तेरापंथ समाज के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। संतों के मंगल प्रवेश के दौरान पूरा परिसर जयकारों और आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान रहा।
मुनि द्वय का विहार एस.एल. मार्ग स्थित शासन सेवी डॉ. नरेश मेहता के ‘गिरनार’ निवास से प्रारंभ हुआ। यहाँ से योगक्षेम रैली के रूप में संत मालवीय नगर स्थित अणुविभा केंद्र पहुंचे। रैली में ज्ञानशाला के बालक-बालिकाओं के साथ बड़ी संख्या में युवक-युवतियां, महिलाएं और समाज के वरिष्ठजन शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा के साथ संतों की अगवानी की।
चातुर्मास आत्मा की साधना का स्वर्णिम अवसर : मुनिश्री तत्त्व रुचि
मंगल प्रवेश के पश्चात आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि “चातुर्मास ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप-संयम की साधना का स्वर्णिम अवसर है।” उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वर्षा ऋतु किसान के लिए खेती और फसल तैयार करने का समय होती है, उसी प्रकार धार्मिक व्यक्ति के लिए चातुर्मास आत्म-साधना और धर्म-ध्यान के बीज बोने का अवसर है।
मुनिश्री ने कहा कि किसान खेती के माध्यम से अन्न प्राप्त करने का लक्ष्य रखता है, वहीं साधक की साधना का अंतिम उद्देश्य अपनी आत्मा को जानना और पाना है। चातुर्मास केवल बाहरी धार्मिक गतिविधियों का समय नहीं, बल्कि भीतर की यात्रा प्रारंभ करने और आत्मचिंतन का अवसर है।
उन्होंने कहा कि वर्षावास कषाय मुक्ति की साधना का भी महत्वपूर्ण काल है। क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी कषायों से मुक्त होकर ही व्यक्ति राग-द्वेष से ऊपर उठ सकता है और आत्मिक शांति की दिशा में आगे बढ़ सकता है। वास्तविक धर्म वही है जो व्यक्ति को भीतर से बदलने और मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे।
आचार्य श्री भिक्षु स्वामी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के द्वितीय चरण में तेरापंथ धर्मसंघ के संस्थापक, आद्य प्रवर्तक एवं प्रथम गुरु आचार्य श्री भिक्षु स्वामी की जन्म त्रिशताब्दी के समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ एवं मुनिश्री संभव कुमार जी ने अपने उद्बोधन में आचार्य श्री भिक्षु के व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण किया।
मुनिश्री ने कहा कि आचार्य श्री भिक्षु केवल तेरापंथ धर्मसंघ के संस्थापक ही नहीं, बल्कि विशुद्ध अध्यात्म धर्म के प्रतिष्ठापक और धर्मक्रांति के महान पुरोधा थे। उनके जीवन और साधना ने समाज को सत्य, संयम, अनुशासन और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाया।
इस अवसर पर समाज की विभिन्न संस्थाओं और उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री भिक्षु स्वामी के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
ॐ भिक्षु जप और वर्षायोग अनुष्ठान से गूंजा वातावरण
कार्यक्रम के दौरान मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने श्रद्धालुओं को वर्षायोग अनुष्ठान एवं ॐ भिक्षु जप अनुष्ठान करवाया। सामूहिक जप से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से भर उठा।
मुनिश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभ संकल्पों की भावना अभिव्यक्त करने का भी उपक्रम कराया। उनकी प्रेरणा से श्रद्धालुओं ने नियमित धार्मिक क्रियाओं के साथ अपनी दैनिक जीवनचर्या में मोबाइल के संयमित उपयोग का संकल्प लेने की भावना व्यक्त की।
मंगल प्रवेश और चातुर्मासिक कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा देखने को मिली। भव्य योगक्षेम रैली से लेकर धर्मसभा और सामूहिक अनुष्ठान तक पूरा आयोजन आस्था, साधना और आत्मचिंतन का संदेश देता नजर आया।








