जयपुर : अणुविभा केन्द्र, मालवीय नगर स्थित महाप्रज्ञ सभागार में सोमवार को तेरापंथ धर्मसंघ के संस्थापक आचार्य श्री भिक्षु स्वामी की 301वीं जन्म जयंती एवं 269वें बोधि दिवस के अवसर पर आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि सम्यग् आचरण के लिए सम्यग् ज्ञान का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सही ज्ञान के बिना आचरण की शुद्धता संभव नहीं है और इसी कारण सम्यक्त्व आत्म विकास की बुनियाद है।
मुनिश्री ने कहा कि आचार्य श्री भिक्षु स्वामी ने भी अहिंसा धर्म की सम्यक् पालना के लिए हिंसा और अहिंसा के स्वरूप की सही जानकारी को आवश्यक बताया था। उन्होंने कहा कि सम्यग् जानकारी के अभाव में धर्म के नाम पर की जाने वाली क्रियाओं में भी अधर्म का आचरण संभव है। मुनिश्री ने दैनिक व्यवहार में प्रचलित ऐसी कुछ क्रियाओं के उदाहरण देते हुए धर्म और अधर्म के वास्तविक स्वरूप को समझाया।
इस अवसर पर मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि संसार और अध्यात्म का मार्ग पूर्व और पश्चिम की तरह अलग-अलग हैं। दोनों को आपस में मिला देने से दोनों की उपयोगिता समाप्त हो जाती है। उन्होंने घी और तंबाकू का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों अपने-अपने स्थान पर उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन उन्हें मिला देने पर दोनों की उपयोगिता समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि सम्यग् दृष्टिकोण के लिए लौकिक और लोकोत्तर धर्म की सम्यग् जानकारी आवश्यक है।
कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर भगवान महावीर की स्तुति से हुआ। इसके बाद मुनिश्री ने आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए प्रवचन की शुरुआत की। कार्यक्रम के दौरान जप, तप, ध्यान और योग सहित विभिन्न आध्यात्मिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।








