बजट से पहले पूंजीगत लाभ कर पर चर्चा, निवेशकों के सुझाव सुनेगी वित्त मंत्री

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डेस्क : शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिया है कि आगामी केंद्रीय बजट से पहले होने वाले विचार-विमर्श के दौरान सरकार इस कर को लेकर निवेशकों की राय सुनने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने कर समाप्त करने या इसकी दरों में बदलाव करने की कोई घोषणा नहीं की है।

नई दिल्ली में आयोजित एक आर्थिक मंच पर वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय और विदेशी निवेशक दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर को लेकर अपनी राय रख रहे हैं। इसके साथ ही प्रतिभूति लेनदेन कर और विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों पर समान कर व्यवस्था लागू करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। उन्होंने निवेशकों के विचारों को महत्वपूर्ण बताते हुए इस बहस को उपयोगी माना।

दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर और प्रतिभूति लेनदेन कर पर चर्चा

दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर किसी परिसंपत्ति को निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रखने के बाद उसकी बिक्री से होने वाले लाभ पर लगाया जाता है। वहीं, प्रतिभूति लेनदेन कर शेयर बाजार में निर्धारित प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री पर लगाया जाता है। इन करों का सीधा असर निवेशकों की लागत और वास्तविक मुनाफे पर पड़ता है।

शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियों के बीच इक्विटी निवेश पर कर व्यवस्था की समीक्षा की मांग भी उठ रही है। भारतीय स्टेट बैंक की अनुसंधान इकाई ने अपनी एक रिपोर्ट में इक्विटी पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर समाप्त करने और निवेश की अवधि बढ़ाने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है।

क्या समाप्त होगा दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर?

वित्त मंत्री के बयान से निवेशकों में कर राहत को लेकर उम्मीदें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन इसे कर समाप्त करने का संकेत या सरकार का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। सरकार की ओर से अभी तक इस कर को समाप्त करने की कोई नई घोषणा नहीं की गई है।

वर्तमान व्यवस्था के तहत पात्र सूचीबद्ध इक्विटी निवेश पर एक वर्ष से अधिक समय में हुए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर निर्धारित छूट सीमा से अधिक राशि के लिए 12.5 प्रतिशत की दर से कर लागू होता है। इसमें बदलाव के लिए सरकार की औपचारिक घोषणा आवश्यक होगी।

बजट पर टिकी निवेशकों की निगाहें

आगामी बजट से पहले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर और प्रतिभूति लेनदेन कर को लेकर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निवेशकों की मांग है कि कर व्यवस्था ऐसी हो, जिससे बाजार में भागीदारी और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा मिले।

अब देखना होगा कि बजट से पहले होने वाले विचार-विमर्श में निवेशकों के सुझावों पर किस तरह विचार किया जाता है। फिलहाल सरकार ने किसी तरह की कर राहत का ऐलान नहीं किया है। ऐसे में निवेशकों को अंतिम फैसले के लिए बजट संबंधी आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।