BRICS में भारत की कूटनीति की यशवंत सिन्हा ने सराहना, बोले- चीन पर भरोसा नहीं, संवाद जरूरी

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नई दिल्ली : पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा के पूर्व वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन को बेहद सफल बताया है। लंबे समय बाद केंद्र सरकार के किसी कदम की तारीफ करते हुए सिन्हा ने कहा कि भारत ने सम्मेलन के दौरान चीन के सामने अपने मुद्दों को मजबूती से रखा।

सिन्हा ने सम्मेलन की सफलता के तीन प्रमुख कारण गिनाए। उन्होंने कहा कि BRICS में आमंत्रित सभी राष्ट्राध्यक्ष सम्मेलन में शामिल हुए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि दूसरी बड़ी उपलब्धि सर्वसम्मति से साझा घोषणापत्र जारी होना रहा। सिन्हा के मुताबिक, इससे पहले मई में दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में मतभेदों के कारण साझा बयान जारी नहीं हो पाया था। ऐसे में इस बार साझा घोषणापत्र जारी होना महत्वपूर्ण सफलता है।

सिन्हा ने कहा कि सम्मेलन के दौरान कई देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं। इनमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक को उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि भारत को चीन पर भरोसा नहीं करना चाहिए, हालांकि बातचीत जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने चीन के सामने अपने मुद्दे मजबूती से उठाए, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच कुछ तल्खी भी देखने को मिली।

पूर्व विदेश मंत्री ने ईरान को लेकर भारत के रुख की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि BRICS सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति की सक्रिय भागीदारी और गाजा तथा लेबनान में इजरायल की कार्रवाई की आलोचना किया जाना संतोष का विषय है। सिन्हा के अनुसार, भारत ने सम्मेलन में अपनी पारंपरिक विदेश नीति के रुख को फिर से मजबूती से सामने रखा।

उन्होंने भारत की अध्यक्षता और सम्मेलन के संचालन की भी तारीफ करते हुए कहा कि कई मुद्दों पर मतभेद के बावजूद भारत ने ऐसी भाषा और रास्ता तैयार किया, जिसे सभी सदस्य देशों ने स्वीकार किया।