ध्यान से जागती है प्रज्ञा, बढ़ता है अन्तर्मुखता का भाव : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी

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जयपुर :  पर्युषण महापर्व के सातवें दिन सोमवार को मालवीय नगर स्थित अणुविभा केन्द्र में मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ के सान्निध्य में ‘ध्यान दिवस’ का आयोजन हुआ। महाप्रज्ञ सभागार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। पर्युषण महापर्व का समापन मंगलवार को संवत्सरी महापर्व के साथ होगा।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि “ध्यान पर ध्यान देने से समस्याओं का सही समाधान हो सकता है।” उन्होंने कहा कि ध्यान आत्म उत्थान का सर्वोत्तम साधन है। नियमित ध्यान से जीवन में प्रज्ञा का जागरण होता है और व्यक्ति अन्तर्मुखी बनता है। इससे मन की चंचलता कम होती है और जीवन को सही दिशा देने की क्षमता विकसित होती है।

मुनिश्री ने जैन दर्शन में वर्णित ध्यान के चार प्रकारों की चर्चा करते हुए कहा कि आर्त और रौद्र ध्यान अशुभ एवं अहितकर हैं, जबकि धर्म ध्यान और शुक्ल ध्यान शुभ माने गए हैं। मनुष्य को शुभ ध्यान की ओर बढ़ते हुए अपने जीवन को अधिक पवित्र और संयमित बनाने का प्रयास करना चाहिए।

मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि ध्यान का प्रभाव जीवन में दिखाई देना चाहिए। ध्यान के माध्यम से राग भाव कम हो और वैराग्य भाव बढ़े। साथ ही तत्त्व जिज्ञासा, अनासक्ति, समचित्तता और कष्ट सहिष्णुता जैसे गुणों का विकास होना चाहिए।

इस अवसर पर मुनिश्री ने भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि महापुरुषों का जीवन हमें जीने की कला सिखाता है। भगवान महावीर ने सदैव बड़ों के प्रति आदर भाव रखा और स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों को कष्ट देने का मार्ग नहीं अपनाया। उनके जीवन से करुणा, सहिष्णुता, संयम और आत्मानुशासन की प्रेरणा ली जा सकती है।

कार्यक्रम में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक से दीक्षा कल्याणक तक की जीवनगाथा भी प्रस्तुत की गई। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के जीवन आदर्शों को आत्मसात कर अपने जीवन को परिष्कृत करने की प्रेरणा दी।

धार्मिक आयोजन के दौरान तपस्या करने वाले श्रद्धालुओं ने भी अपने तप के प्रत्याख्यान लिए। भाई अंकित जी छाजेड़ ने 36वें उपवास, वरुण जी बरड़िया ने सातवें, रोशन जी एवं हर्ष जी मोदी ने नौवें, श्रेयांस जी पारख ने सातवें उपवास, मोनिका जी नवलखा ने तेले तथा इन्द्रा जी संचेती ने सातवें उपवास का प्रत्याख्यान किया। अमेरिका की 13 वर्षीय सृष्टि जी जैन ने चौले तप का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में तेरापंथ युवक परिषद के संदीप जी भंडारी, सौरभ जी जैन और राजेश जी संचेती सहित अन्य सदस्यों ने ध्यान पर आधारित मधुर गीत का संगान किया।

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष शांतिलाल जी गोलछा ने बताया कि तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत स्थानीय तेरापंथ सभा की ओर से आयोजन किया जा रहा है। सभा के सहमंत्री सुरेश जी बरड़िया ने बताया कि मंगलवार को मुनिश्री के सान्निध्य में अणुविभा केन्द्र में संवत्सरी महापर्व का आयोजन होगा। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से अष्टप्रहरी पौषध करने की अपील की।

सभा के मुख्य ट्रस्टी आलोक जी हीरावत ने तपस्वियों का परिचय देते हुए उनकी तपस्या की अनुमोदना की तथा सभी संस्थाओं और श्रद्धालुओं को साथ लेकर तप अनुमोदना कार्यक्रम में सहभागिता की।