ब्रिक्स में फिलहाल साझा मुद्रा का कोई प्रस्ताव नहीं : सुधाकर दलेला

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नई दिल्ली :  ब्रिक्स देशों के बीच फिलहाल साझा मुद्रा शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को स्थानीय मुद्राओं में निपटाने को लेकर चर्चा जारी रहेगी। विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद मीडिया को यह जानकारी दी।

दलेला ने कहा कि “फिलहाल ब्रिक्स में साझा मुद्रा की कोई योजना नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान का मुद्दा नया नहीं है और इस पर ब्रिक्स में पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय मुद्रा में व्यापार का उद्देश्य मौजूदा वैश्विक भुगतान एवं निपटान व्यवस्था को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे पूरक बनाना है। इससे द्विपक्षीय व्यापार में लेन-देन की लागत कम करने और भुगतान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर

नई दिल्ली घोषणा में भी ब्रिक्स देशों की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए जारी चर्चाओं का उल्लेख किया गया है। इसमें सदस्य देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए किसी एक समान व्यवस्था को सभी पर लागू करने के बजाय व्यावहारिक विकल्पों पर जोर दिया गया है।

घोषणा में ब्रिक्स भुगतान कार्यबल को सीमा पार भुगतान और संदेश प्रणाली की आपसी अनुकूलता पर काम जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसका उद्देश्य तेज, कम लागत वाली, सुलभ, पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी भुगतान व्यवस्था विकसित करना है।

आठ महीने में हुईं 350 से अधिक बैठकें

सुधाकर दलेला ने बताया कि भारत की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों के तहत पिछले आठ महीनों में 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। इनमें विभिन्न विषयों पर बैठकें, मंत्रीस्तरीय बैठकें, कार्य समूह, कारोबारी सत्र और अन्य कार्यक्रम शामिल रहे।

उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन में जारी संघर्षों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के प्रभाव पर भी चर्चा हुई। ब्रिक्स नेताओं ने मतभेदों के समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण तरीकों के महत्व पर जोर दिया।

फिलहाल ब्रिक्स का फोकस साझा मुद्रा के बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और सीमा पार भुगतान को अधिक सुगम बनाने पर है।