चीन का नया रक्षा कानून: युद्ध की स्थिति में नागरिक संसाधनों पर भी सरकार का अधिकार

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डेस्क : चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्धकालीन तैयारियों को लेकर अपने कानूनों में एक और बड़ा बदलाव किया है। चीन की शीर्ष विधायिका ने 28 अगस्त 2026 को संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून (National Defence Mobilisation Law) को मंजूरी दे दी। यह कानून 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। नए प्रावधानों के तहत युद्ध या अन्य गंभीर संकट की स्थिति में सरकार को नागरिकों, निजी कंपनियों और सामाजिक संगठनों के संसाधनों तथा क्षमताओं को राष्ट्रीय रक्षा के लिए इस्तेमाल करने के व्यापक अधिकार मिलेंगे।

यह कानून वर्ष 2010 में लागू मूल कानून का पहला बड़ा संशोधन है। इसमें 14 अध्याय और 82 अनुच्छेद हैं। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, संशोधन का उद्देश्य शांतिकाल और युद्धकाल के बीच तेजी से बदलाव की व्यवस्था मजबूत करना, सैन्य और नागरिक संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाना तथा राष्ट्रीय रक्षा और आर्थिक-सामाजिक विकास के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

पार्टी नेतृत्व के तहत आएगी लामबंदी व्यवस्था

अमेरिका स्थित जेम्सटाउन फाउंडेशन की चीन विशेषज्ञ सामंथा हॉफमैन के अनुसार, संशोधित कानून के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी व्यवस्था को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के नेतृत्व में लाना शामिल है।

2010 के कानून में इसकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य परिषद और केंद्रीय सैन्य आयोग से जुड़ी थी। संशोधन के बाद पार्टी नेतृत्व की भूमिका और अधिक स्पष्ट हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संकट की स्थिति में सैन्य, आर्थिक और सामाजिक संसाधनों को एक केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ेगी।

निजी संपत्ति और संसाधनों के अधिग्रहण का प्रावधान

संशोधित कानून में नागरिक संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधानों को भी विस्तार दिया गया है। पहले जहां संसाधनों को ‘रिक्विजिशन’ यानी सरकारी आवश्यकता के लिए लिया जा सकता था, वहीं अब ‘एक्सप्रोप्रिएशन और रिक्विजिशन’ दोनों का प्रावधान किया गया है।

इसके तहत जरूरत पड़ने पर भवन, उपकरण, वाहन, जमीन, प्रतिष्ठान और अन्य नागरिक संसाधनों को अस्थायी रूप से इस्तेमाल या अधिग्रहित किया जा सकता है। आदेश का पालन नहीं करने या इसमें देरी करने पर अनिवार्य कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान भी है।

नागरिकों और कंपनियों की भूमिका बढ़ी

कानून केवल सेना तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में आम नागरिकों, निजी कंपनियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

परिवहन, डाक सेवाएं, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा एवं दवा आपूर्ति, खाद्यान्न, इंजीनियरिंग और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी के लिए विशेष रूप से तैयार रखने की व्यवस्था की गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, साइबर सुरक्षा को इस सूची में प्रमुखता से शामिल करना आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को दर्शाता है। कानून में उन्नत तकनीकों और उभरते क्षेत्रों में राष्ट्रीय रक्षा क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।

पुरुषों और महिलाओं के लिए सैन्य सेवा का प्रावधान

नए कानून में 18 से 60 वर्ष तक के पुरुषों और 18 से 55 वर्ष तक की महिलाओं के राष्ट्रीय रक्षा सेवा से जुड़े दायित्वों का प्रावधान बरकरार रखा गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई नया प्रावधान नहीं है और मूल 2010 के कानून में भी मौजूद था।

एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो लाइल मॉरिस के अनुसार, नागरिकों की लामबंदी संबंधी अधिकांश जिम्मेदारियां पहले से ही 2010 के कानून में मौजूद थीं। उनके मुताबिक, नए संशोधनों में राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भूमिका और डेटा प्रबंधन से जुड़े प्रावधान अधिक महत्वपूर्ण हैं।

डेटा और सूचना प्रबंधन पर भी जोर

संशोधित कानून में पहली बार सूचना प्रबंधन को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी से संबंधित गलत सूचना तैयार करने या फैलाने पर रोक लगाई गई है।

शांतिकाल में भी सरकार को नागरिक और सैन्य क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों तथा क्षमताओं से संबंधित आंकड़े जुटाने और उनका आकलन करने की व्यवस्था दी गई है। इससे सरकार संभावित संकट की स्थिति में उपलब्ध मानव संसाधन, औद्योगिक क्षमता और आवश्यक वस्तुओं की जानकारी पहले से रख सकेगी।

‘विकास हितों’ को भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा

2010 के कानून में राष्ट्रीय संप्रभुता, एकीकरण, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की रक्षा पर जोर था। संशोधित कानून में अब ‘विकास हितों’ को भी इसमें शामिल किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की नीति में विकास हितों का दायरा आर्थिक सुरक्षा, संसाधनों तक पहुंच, विदेशों में मौजूद परिसंपत्तियों और तकनीकी विकास तक फैला हुआ है। इसका अर्थ है कि राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी की अवधारणा अब केवल प्रत्यक्ष सैन्य खतरे तक सीमित नहीं रहेगी।

विशेषज्ञों ने दी सतर्कता की सलाह

यूरोप-रूस-एशिया संबंधों की विशेषज्ञ थेरेसा फॉलन ने संशोधित कानून को लेकर चिंता जताई है और इसे चीन की युद्धकालीन तैयारियों के व्यापक संदर्भ में देखने की बात कही है।

हालांकि, दूसरी ओर विशेषज्ञ लाइल मॉरिस ने यह चेतावनी भी दी है कि संशोधित कानून को चीन द्वारा अचानक शुरू की गई युद्ध तैयारी के रूप में देखना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, चीन की राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी व्यवस्था वर्ष 2010 के कानून के बाद से ही लगातार विकसित हो रही है।

ताइवान और अमेरिका पर नजर

विश्लेषकों का मानना है कि चीन द्वारा सैन्य और नागरिक संसाधनों के बीच समन्वय बढ़ाने की यह नीति संभावित भविष्य के संघर्षों की तैयारी से जुड़ी हो सकती है। ताइवान और अमेरिका को चीन के संभावित रणनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के रूप में देखा जाता है।

संशोधित कानून ऐसे समय आया है जब बीजिंग राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य आधुनिकीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर लगातार जोर दे रहा है। हालांकि, कानून अपने आप में किसी आसन्न युद्ध की घोषणा नहीं है, लेकिन इससे यह स्पष्ट होता है कि चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों को समाज और अर्थव्यवस्था के व्यापक ढांचे से जोड़ने की दिशा में कदम और मजबूत किया है।