डेस्क : भारत ने अपनी मिसाइल निर्माण क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा डीआरडीओ की तकनीक के इस्तेमाल के साथ पारंपरिक मिसाइल क्षेत्र में निजी कंपनियों को प्रवेश देने की अनुमति के बाद अब सरकार 1000 से 1500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली लैंड अटैक क्रूज मिसाइल के उत्पादन के लिए निजी कंपनियों की पहचान कर रही है।
इसके साथ ही 150 से 500 किलोमीटर तक की रेंज वाली प्रलय क्वासी-बैलिस्टिक टैक्टिकल मिसाइल के उत्पादन में भी निजी क्षेत्र को शामिल करने की तैयारी है। सरकार का यह फैसला भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कई बड़ी कंपनियां उत्पादन में होंगी शामिल
रिपोर्ट के मुताबिक, ICOMM, भारत फोर्ज, अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी कंपनियां विभिन्न मिसाइल प्रणालियों के उत्पादन में भूमिका निभा सकती हैं। इनमें नेक्स्ट जेनरेशन एंटी-रेडिएशन मिसाइल, रुद्रम-II, यूएवी लॉन्च्ड प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल और कई एंटी-शिप मिसाइलें शामिल हैं।
एस्ट्रा मिसाइल के लिए पहले ही जारी हो चुका है RFP
निजी क्षेत्र की भागीदारी केवल लंबी दूरी की मिसाइलों तक सीमित नहीं है। एस्ट्रा मार्क-I और मार्क-II जैसी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए निजी कंपनियों को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर रूट के तहत रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल पहले ही जारी किए जा चुके हैं। एस्ट्रा मार्क-I की रेंज 110 किलोमीटर और मार्क-II की रेंज 150 किलोमीटर बताई गई है।
रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से भारत की मिसाइल उत्पादन क्षमता में बड़े पैमाने पर विस्तार की उम्मीद है। सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत और देश के सैन्य औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मान रही है।








