थरूर ने विपक्ष को दिखाया आईना, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ में दिखी युवाओं की ताकत

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डेस्क : कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने युवाओं के बीच चर्चा में आए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बहाने देश की मौजूदा राजनीति और विपक्ष की भूमिका पर बड़ा सवाल उठाया है। थरूर ने अपने लेख में इस नए राजनीतिक प्रयोग को युवाओं की बदलती राजनीतिक सोच का संकेत बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी अब अपनी आवाज खुद उठाने लगी है।

थरूर के मुताबिक, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ किसी पारंपरिक राजनीतिक दल की तरह संगठित पार्टी नहीं है, बल्कि युवाओं के असंतोष और उनकी समस्याओं से निकला एक नया राजनीतिक-सामाजिक प्रयोग है। उन्होंने इसे युवाओं की उस बेचैनी से जोड़कर देखा, जो रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में देरी जैसे मुद्दों को लेकर लगातार सामने आ रही है।

पारंपरिक राजनीति से अलग दिखा युवाओं का प्रयोग

थरूर ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की खास बात यह है कि इसके पीछे कोई स्थापित राजनीतिक संगठन नहीं था। युवाओं ने सोशल मीडिया और अपने स्तर पर एक व्यंग्यात्मक नाम को आंदोलन का प्रतीक बना दिया और देखते ही देखते यह चर्चा का विषय बन गया।

उन्होंने इसे राजनीति में नई पीढ़ी की भागीदारी के संकेत के तौर पर देखा। थरूर का कहना है कि युवा अब केवल राजनीतिक दलों की रैलियों में भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय अपनी समस्याओं और नाराजगी को सीधे सामने रखने का रास्ता तलाश रहे हैं।

विपक्षी दलों के लिए भी संदेश

शशि थरूर ने इस पूरे घटनाक्रम को विपक्षी दलों के लिए भी एक सबक बताया। उनके अनुसार, विपक्ष लंबे समय से जातीय समीकरण, संवैधानिक मुद्दों और सत्ता विरोधी राजनीति पर ज्यादा जोर देता रहा है, जबकि युवाओं से जुड़े रोजमर्रा के सवालों को उतनी मजबूती से राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया गया।

उन्होंने रोजगार, भर्ती में देरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पेपर लीक जैसे मुद्दों को युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष की बड़ी वजह बताया। थरूर के मुताबिक, अगर राजनीतिक दल इन सवालों को गंभीरता से नहीं उठाते हैं तो युवा अपने लिए नए मंच और नए तरीके तलाश सकते हैं।

‘विपक्ष खुद संभाल सकता है मोर्चा’

थरूर ने यह भी संकेत दिया कि विपक्ष को हर राजनीतिक मुद्दे पर किसी नए आंदोलन या बाहरी मंच के सहारे की जरूरत नहीं है। विपक्ष के पास युवाओं से जुड़ने और उनके मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में शामिल करने की पर्याप्त क्षमता है।

उन्होंने राजनीतिक दलों से युवाओं को केवल चुनावी भीड़ या कार्यकर्ता के तौर पर देखने के बजाय निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी देने की जरूरत पर जोर दिया।

थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश की राजनीति में युवाओं, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर उनकी टिप्पणी को विपक्ष की रणनीति और नई पीढ़ी के साथ उसके संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।