छात्रों के अधिकारों के उल्लंघन पर आंखें बंद नहीं करेगा न्यायालय : मुख्य न्यायाधीश

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डेस्क : भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना छात्रों का मौलिक अधिकार है और इसके उल्लंघन की स्थिति में न्यायपालिका मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से छात्रों के खिलाफ कथित कठोर कार्रवाई के मामलों में अदालत उचित हस्तक्षेप करेगी।

मुख्य न्यायाधीश ने शनिवार को पटना स्थित चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान यह बात कही। छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका और नागरिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।

एक छात्रा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल किया। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो अदालत इस पर आंखें बंद नहीं करेगी। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के छात्रों के अधिकार की रक्षा के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता दोहराई।

यह सवाल दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम के संदर्भ में पूछा गया था। इस मामले में पुलिस पर कथित लाठीचार्ज और अन्य कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट पहले ही एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर चुका है। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई की शिकायतों की जांच के लिए समिति के गठन को मंजूरी दी थी। अदालत ने समिति से मामले के विभिन्न पहलुओं की निष्पक्ष और विस्तृत जांच करने को कहा है।

संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका और कॉलेजियम से जुड़े सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता महत्वपूर्ण है, लेकिन व्यक्तिगत गरिमा और संस्थागत जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है।

मुख्य न्यायाधीश ने विद्यार्थियों के साथ संवाद को न्यायिक व्यवस्था और युवा पीढ़ी के बीच सीधे संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने छात्रों से संवैधानिक मूल्यों, कानून और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का भी आह्वान किया।