नई दिल्ली : मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने शनिवार को निर्वाचन सदन में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ बैठक की। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता पंजीकरण, ECINET और आयोग से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद चुनाव आयोग की ओर से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की गई।
आयोग ने कहा कि 24 जून 2025 को जारी विशेष गहन पुनरीक्षण का आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। इसके बाद विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी किए गए कार्यक्रमों को भी सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने SIR के मूल आदेश को बरकरार रखा था।
SIR प्रक्रिया के दौरान ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं को लेकर भी आयोग ने नई व्यवस्था की जानकारी दी। ऐसे मतदाताओं के घर जाकर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे। आयोग के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मतदाताओं को ERO या AERO कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल असाधारण परिस्थितियों में सुनवाई की जाएगी और उसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराया जा सकेगा।
आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR से संबंधित दावों और आपत्तियों की समयसीमा में भी बदलाव किया है। दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तथा उनके निस्तारण की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। वहीं महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और उनके निस्तारण की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 तय की गई है।
नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर आयोग ने कहा कि SIR के दौरान जोड़ी गई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त है। ECINET के संबंध में आयोग ने बताया कि अधिकारियों को उनकी वैधानिक जिम्मेदारियों के अनुरूप भूमिका-आधारित पहुंच प्रदान की गई है। सिस्टम की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त के साथ IIT या IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा।
कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र के संबंध में भी आयोग ने स्पष्टीकरण दिया। आयोग के अनुसार, यह मामला किसी नीति या IT डिवीजन से संबंधित नीतिगत निर्णय का नहीं, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्त एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी के काम के पुनर्वितरण से जुड़े आदेश वास्तव में लागू नहीं किए गए थे।
बैठक के बाद आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण को SIR प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण और आयोग के आंतरिक कामकाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने के प्रयास के तौर पर देखा गया।








