जयपुर : मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरूण” ने कहा कि सफलता का मूल आधार धैर्य है। जो व्यक्ति धैर्यशील होता है, उसे अपने न्याय और सत्य के मार्ग से न कोई विचलित कर सकता है और न ही समाप्त कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धैर्यवान व्यक्ति को चाहे जितनी भी परिस्थितियाँ परेशान करें, उसे परास्त नहीं किया जा सकता।
वे मंगलवार को अजमेर रोड स्थित टैगोर नगर के नवोदित अणुव्रत भवन में आयोजित साप्ताहिक आध्यात्मिक प्रवचन माला के तीसरे दिन “धैर्य” विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
मुनि श्री ने कहा कि धैर्य ही सफलता की वास्तविक कसौटी है। जीवन में विशिष्ट उपलब्धियाँ केवल उन्हीं लोगों को प्राप्त होती हैं जो धैर्य का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में धैर्य और सब्र का भाव जैसे दुर्लभ होता जा रहा है। प्रत्येक क्षेत्र में शीघ्रता और उतावलापन बढ़ता जा रहा है, जबकि सत्य यह है कि सफलता समय से पूर्व प्राप्त नहीं होती।
उन्होंने कहा कि यह जानते हुए भी लोग अधीरता का मार्ग अपनाते हैं, जो अंततः असफलता का प्रमुख कारण बनता है। मुनि श्री ने कहा कि अधीर मनुष्य न केवल अपने निर्णयों में भ्रमित होता है, बल्कि जीवन की स्थिरता भी खो देता है।
कार्यक्रम में मुनि श्री संभव कुमार जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि धैर्य के फल सदैव मधुर होते हैं। जो व्यक्ति संतुलन नहीं खोता और धैर्य बनाए रखता है, उसे ही अपने लक्ष्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बांध टूटने से बाढ़ आ सकती है, लेकिन जब सब्र का बांध टूटता है तो वह स्थिति और भी विनाशकारी हो जाती है।
मुनि श्री ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में जिम्मेदार व्यक्तियों के लिए संयम और धैर्य का पालन अत्यंत आवश्यक हो गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान विमल प्रभु की स्तुति के साथ हुई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक दिवसीय संकल्प ग्रहण किया तथा चार शरण के उच्चारण का आध्यात्मिक आयोजन सम्पन्न हुआ।


