डेस्क : आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए पार्टी की सियासी ताकत को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान आप के वोट शेयर में करीब 20 प्रतिशत का अंतर रहता है। केजरीवाल के मुताबिक, यह अंतर इस बात का संकेत है कि पार्टी को भाजपा के मतदाताओं का भी समर्थन मिलता है।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप को करीब 52 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर लगभग 32 प्रतिशत रहा। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बीच आप के वोट शेयर में जो अंतर आता है, उसका एक बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर जाने वाले मतदाताओं से जुड़ा है।
कांग्रेस के वोट काटने वाली पार्टी नहीं: केजरीवाल
आप संयोजक ने इस धारणा को खारिज किया कि उनकी पार्टी केवल कांग्रेस के वोटों में सेंध लगाती है। उन्होंने कहा कि आप को भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के मतदाताओं का समर्थन मिलता है। केजरीवाल के इस बयान को आगामी चुनावों में पार्टी की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
गोवा में दोनों प्रमुख दलों के वोटरों पर नजर
गोवा की राजनीति का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी वहां भाजपा और कांग्रेस दोनों के मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी खुद को दोनों दलों के विकल्प के तौर पर पेश करेगी।
केजरीवाल ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने भाजपा के मजबूत प्रभाव वाले क्षेत्र में भी चुनावी सफलता हासिल की है। उनका कहना है कि इससे स्पष्ट है कि भाजपा के कुछ मतदाता भी आप को विकल्प के रूप में स्वीकार कर सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों के लिए केजरीवाल का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि आप अब अपने विस्तार की रणनीति में केवल कांग्रेस विरोधी वोटों पर निर्भर रहने के बजाय भाजपा के मतदाताओं में भी सेंध लगाने की कोशिश करती दिखाई दे रही है। दिल्ली के बाद गोवा में पार्टी का यह सियासी प्रयोग कितना सफल होता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।








