डेस्क : ईरान और कनाडा के बीच कूटनीतिक तनाव उस समय और बढ़ गया, जब ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कनाडा पर तीखा हमला बोला। बघाई ने कनाडा के रुख को ‘रणनीतिक भ्रम’ करार देते हुए आरोप लगाया कि ओटावा अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहा है।
बघाई ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि कनाडा खुद को शांति, सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थक नहीं बता सकता, जबकि वह ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और प्रतिबंधों का समर्थन कर रहा है।
उन्होंने कनाडा की विदेश नीति की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाया। बघाई ने कहा कि यदि वास्तव में मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता का है तो कनाडा को अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों का समर्थन करने के बजाय तनाव कम करने की अपील करनी चाहिए थी।
ईरानी प्रवक्ता ने कनाडा के रुख को ‘कूटनीति’ और ‘जिम्मेदार राजकीय नीति’ के विपरीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा अमेरिकी दबाव के आगे झुक रहा है और यह नीति भविष्य में उसे अमेरिकी दबाव से बचाने में भी सक्षम नहीं होगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर आरोप-प्रत्यारोप
बघाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने से पहले तक जलडमरूमध्य खुला और सुरक्षित था।
तेहरान की यह प्रतिक्रिया कनाडा के विदेश मंत्री अनिता आनंद और वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन के संयुक्त बयान के बाद सामने आई। कनाडाई मंत्रियों ने ईरान की मध्य-पूर्व में कथित अस्थिरकारी गतिविधियों की कड़ी निंदा करते हुए उसे तत्काल बंद करने की मांग की थी।
कनाडा ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को धमकी देने, परमाणु गतिविधियों को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन देने का आरोप लगाया। ओटावा के अनुसार, इन गतिविधियों से वैश्विक शांति और सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ कनाडा
कनाडा ने कहा कि वह ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए जी-7 समेत अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। कनाडा ने होर्मुज जलडमरूमध्य में महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग को फिर से खोलने के लिए अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के प्रयासों का समर्थन करने की बात कही है।
ओटावा ने यह भी कहा कि वह ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को जारी रखेगा। कनाडा के अनुसार, 2010 से अब तक उसने विशेष आर्थिक उपाय अधिनियम और न्याय पीड़ित भ्रष्ट विदेशी अधिकारियों अधिनियम के तहत 492 ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं।
तेल टैंकरों पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया, जब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से ‘अनधिकृत मार्ग’ से गुजर रहे तीन तेल टैंकरों और क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े तीन जहाजों को निशाना बनाया।
ईरानी सरकारी प्रसारक के अनुसार, आईआरजीसी नौसेना ने इससे पहले अमेरिका पर तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाने और उन्हें नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था। ईरान ने इसे होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश बताया और क्षेत्र में मौजूद जहाजों को कथित तौर पर अनधिकृत जलमार्गों से दूर रहने की चेतावनी दी।
अमेरिका-कनाडा व्यापार तनाव भी बढ़ा
ईरान और कनाडा के बीच बढ़े इस कूटनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि में अमेरिका और कनाडा के बीच जारी व्यापारिक तनाव भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता में गतिरोध के बाद प्रमुख वस्तुओं पर जवाबी शुल्क लगाने की धमकियों से संबंधों में खिंचाव बढ़ा है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के साथ स्थायी व्यापार समझौते के लिए बातचीत की इच्छा जताई है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का ‘सबसे खराब दुरुपयोग करने वालों’ में से एक बताया और कनाडाई कंपनियों को शुल्क से बचने के लिए अमेरिका में अपना कारोबार स्थानांतरित करने की सलाह दी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान और कनाडा के बीच बयानबाजी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है।








