डेस्क : भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का आयोजन प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में किया जाएगा। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है और समूह का हाल के वर्षों में विस्तार भी हुआ है।
शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले 11 सितंबर को भारत मंडपम में ब्रिक्स बिजनेस फोरम और वुमेन बिजनेस अलायंस का सत्र आयोजित किया जाएगा। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत देश के 25 से अधिक शहरों में अब तक 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
‘मानवता प्रथम’ की सोच के साथ भारत की अध्यक्षता
भारत ने 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण को केंद्रीय विषय बनाया है। इसके साथ ही अध्यक्षता की व्यापक सोच “Humanity First” पर आधारित है।
शिखर सम्मेलन में आर्थिक विकास, तकनीकी सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सतत विकास और वैश्विक संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। सदस्य देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ ठोस और व्यावहारिक परिणाम हासिल करने पर भी जोर रहेगा।
व्यापार से लेकर एआई और ऊर्जा सुरक्षा तक चर्चा
बैठक में वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक मजबूत बनाने, सीमा पार भुगतान व्यवस्था के एकीकरण, राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई के विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
इसके अलावा डिजिटल व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति, विकास वित्त और न्यू डेवलपमेंट बैंक के विस्तार पर भी चर्चा होगी। वैश्विक वित्तीय और राजनीतिक संस्थानों में सुधार का मुद्दा भी एजेंडे में महत्वपूर्ण स्थान रखेगा।
शिखर सम्मेलन के अंत में सदस्य देशों के बीच सहमति बनने पर संयुक्त नेताओं की घोषणा जारी की जा सकती है।
11 सदस्य देशों का हो चुका है विस्तार
ब्रिक्स के विस्तारित 11 सदस्यीय समूह में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इंडोनेशिया को 2025 में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।
इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम ब्रिक्स के साझेदार देशों के रूप में व्यापक ढांचे में शामिल हैं। हालांकि ये पूर्ण सदस्य देशों से अलग श्रेणी में हैं।
पुतिन की मौजूदगी, शी जिनपिंग पर नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।
यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं तो 2019 में मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई अनौपचारिक बैठक के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। ऐसे में भारत-चीन संबंधों को लेकर दोनों नेताओं के बीच संभावित बातचीत भी सम्मेलन का महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलू बन सकती है।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद सहित कई प्रमुख नेता इसमें भाग लेंगे। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल की भी भागीदारी प्रस्तावित है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस के भी शामिल होने की उम्मीद है।
चार बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है भारत
भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। 2026 में चौथी बार भारत इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है।
2012 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने ब्रिक्स को एक अनौपचारिक संवाद मंच से आगे ले जाकर अधिक संस्थागत स्वरूप देने पर जोर दिया था। इसी दौर में दक्षिणी देशों द्वारा वित्तपोषित बहुपक्षीय विकास बैंक की अवधारणा सामने आई, जिसने आगे चलकर 2014 में न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना की नींव रखी।
2016 के गोवा शिखर सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद, क्षेत्रीय संपर्क और सामूहिक सुरक्षा को प्रमुखता दी। वहीं 2021 में कोरोना महामारी और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव के बीच भारत ने “BRICS@15: Intra-BRICS Cooperation for Continuity, Consolidation and Consensus” थीम के साथ समूह में सहयोग और सहमति बनाए रखने पर जोर दिया।
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने का प्रयास
2026 की अध्यक्षता में भारत का जोर ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को प्रमुखता देने पर है। विस्तारित ब्रिक्स के मंच से भारत वित्तीय समावेशन, संस्थागत सुधार, तकनीकी सहयोग और सतत विकास जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
20 साल पूरे कर चुके ब्रिक्स का यह शिखर सम्मेलन समूह के विस्तार के बाद पहला बड़ा नेताओं का सम्मेलन भी होगा। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली बैठक को वैश्विक व्यापार, वित्तीय व्यवस्था, तकनीकी सहयोग, जलवायु कार्रवाई और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








