फ्रांस में भड़का छात्र आंदोलन, कई शहरों में प्रदर्शन; पीएम ने बुलाई आपात बैठक

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डेस्क : फ्रांस में स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। देश के कई शहरों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने आपात बैठक बुलाई है।

प्रदर्शन की शुरुआत स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों को लेकर हुई थी। छात्रों का कहना है कि कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है और बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। लंबे स्कूल घंटों और पढ़ाई के बढ़ते दबाव को लेकर भी छात्र संगठनों में नाराजगी है।

धीरे-धीरे यह आंदोलन पेरिस सहित कई अन्य शहरों तक फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने कई स्कूलों के बाहर रास्ते बाधित किए। कुछ जगहों पर कचरे के कंटेनरों में आग लगाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी हुईं। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर कार्रवाई की।

अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया है। झड़पों में प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी सूचना है। कुछ इलाकों में स्कूलों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

विश्वविद्यालयों में भी पहुंचा आंदोलन

हाईस्कूल के छात्रों के बाद अब कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी भी आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। पेरिस, मार्सिले, लियोन, स्ट्रासबर्ग और अन्य शहरों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए। कई विश्वविद्यालय परिसरों में प्रदर्शन और अवरोध के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं।

छात्र संगठनों की प्रमुख मांगों में स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति, कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या कम करना, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार शामिल हैं।

सरकार ने बुलाई आपात बैठक

स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों के साथ आपात बैठक बुलाई है। सरकार की ओर से प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और आगजनी की घटनाओं की निंदा की गई है। साथ ही छात्रों की शिक्षा से जुड़ी शिकायतों पर बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की बात कही गई है।

सरकार का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं, छात्रों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

फ्रांस में बढ़ता छात्र आंदोलन सरकार के लिए नई चुनौती बन गया है। आने वाले दिनों में आंदोलन का रुख और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम के लिए महत्वपूर्ण होंगे।