डेस्क : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए तीन मुस्लिम सांसदों ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से दूरी साफ कर दी है। बहरामपुर से यूसुफ पठान, जंगीपुर से खलीलुर रहमान और मुर्शिदाबाद से अबू ताहेर खान मंगलवार को एनडीए की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक में शामिल नहीं हुए। तीनों सांसद इससे पहले 21 जुलाई को हुई पहली बैठक से भी दूर रहे थे।
अबू ताहेर खान ने साफ किया रुख
मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहेर खान ने संसद परिसर में पत्रकारों से कहा कि वे एनडीए के साथ नहीं हैं और न ही भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीनों सांसदों ने बैठक में शामिल नहीं होकर एक संदेश दिया है।
खान ने कहा कि वे मुसलमानों के हितों के खिलाफ किसी भी कदम का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से बुलाई गई उन बैठकों में शामिल होंगे, जो उनके संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों से संबंधित होंगी।
मतदाताओं की नाराजगी भी बनी वजह
सूत्रों के अनुसार, मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन तीनों सांसदों ने अपने मतदाताओं के एक वर्ग की ओर से भाजपा के साथ कथित नजदीकी को लेकर उठाए गए सवालों के बाद एनडीए की बैठक से दूरी बनाए रखने का फैसला किया।
इस घटनाक्रम ने एनसीपीआई के भीतर और एनडीए के साथ उसके संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।
एनसीपीआई को अभी नहीं मिली मान्यता
तीनों सांसदों की अनुपस्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लोकसभा में 20 सांसदों वाले एनसीपीआई समूह को अभी तक आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है। इस संबंध में मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष लंबित है।
दल-बदल रोधी कानून के तहत अलग हुए इस समूह को संरक्षण मिलने के लिए तृणमूल कांग्रेस के मूल 28 लोकसभा सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी है।
एनसीपीआई के सदन नेता बैठक में पहुंचे
एनसीपीआई के सदन नेता सुदीप बंद्योपाध्याय मंगलवार को पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल हुए। उन्होंने एनसीपीआई में किसी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के सभी सदस्य एकजुट हैं।
एनडीए की बैठक में भाजपा के अलावा जदयू, जद(एस), राकांपा, शिवसेना और एनसीपीआई के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। बैठक में सरकार की खेल नीति, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं सहित विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं।
तीन मुस्लिम सांसदों का एनडीए की बैठक से लगातार दूसरी बार दूर रहना पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ एनडीए के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा को भी हवा दे रहा है।








