एनएसजी के पहले महानिदेशक आरटी नागरानी का निधन, 98 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

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नई दिल्ली : राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के पहले महानिदेशक और 1986 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से हथियारबंद आतंकियों को बाहर निकालने के लिए चलाए गए ऑपरेशन ब्लैक थंडर-1 का नेतृत्व करने वाले आरटी नागरानी का रविवार को निधन हो गया। वह 98 वर्ष के थे। अधिकारियों के अनुसार, नागरानी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उन्होंने दक्षिण दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को किया जाएगा।

नागरानी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के आंध्र प्रदेश कैडर के 1951 बैच के अधिकारी थे। उन्होंने 17 अगस्त 1984 से 25 सितंबर 1986 तक एनएसजी के प्रमुख के रूप में ‘ब्लैक कैट्स’ कमांडो बल का नेतृत्व किया। वर्ष 1987 में वह सेवानिवृत्त हुए। उनके परिवार में तीन बेटे हैं।

वर्तमान एनएसजी प्रमुख ने दी श्रद्धांजलि

नागरानी के निधन पर एनएसजी के वर्तमान महानिदेशक ब्रिघु श्रीनिवासन ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नागरानी ने एक ऐसा अनूठा बल खड़ा किया, जिसका दुनिया में कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। उनके द्वारा स्थापित मूल्यों और आदर्शों ने एनएसजी के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया, जिस पर आज यह बल मजबूती से खड़ा है।

श्रीनिवासन ने कहा कि एनएसजी के अधिकारी और जवान नागरानी जैसे महान लोगों द्वारा रखी गई मजबूत नींव के कारण ही आगे बढ़ रहे हैं।

एनएसजी ने सोशल मीडिया पर दी श्रद्धांजलि

एनएसजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अपने पहले महानिदेशक को श्रद्धांजलि दी। एनएसजी ने उन्हें दूरदर्शी नेता और संस्था निर्माता बताते हुए कहा कि नागरानी ने असाधारण दूरदृष्टि और अटूट समर्पण के साथ बल की नींव रखी।

एनएसजी के अनुसार, उनके नेतृत्व में ऐसे मूल्य, अनुशासन और कार्यप्रणाली विकसित की गई, जिन्होंने इस बल को देश के प्रमुख आतंकवाद रोधी बलों में शामिल करने की मजबूत नींव रखी। एनएसजी ने कहा कि यह बल आज अपनी सटीकता, साहस और उत्कृष्ट कार्यशैली के लिए जाना जाता है।

क्या था ऑपरेशन ब्लैक थंडर-1

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, ऑपरेशन ब्लैक थंडर-1 30 अप्रैल 1986 की रात अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में शुरू हुआ था और अगले दिन सुबह तक चला। उस समय मंदिर परिसर में कई सप्ताह से हथियारबंद उग्रवादियों के मौजूद होने की सूचना थी। अभियान की कमान तत्कालीन पंजाब पुलिस महानिदेशक जूलियो रिबेरो ने संभाली थी।

ऑपरेशन के दौरान करीब 300 एनएसजी कमांडो और सीमा सुरक्षा बल के लगभग 700 जवानों को तैनात किया गया था। अभियान के बाद करीब 200 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से हथियार बरामद किए गए। कार्रवाई में एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि दो लोग घायल हुए।

बताया जाता है कि करीब आठ घंटे चले इस अभियान को उस समय पंजाब के मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला की मंजूरी मिली थी। ऑपरेशन ब्लैक थंडर-1 को पंजाब में आतंकवाद के दौर के दौरान स्वर्ण मंदिर परिसर में की गई प्रमुख सुरक्षा कार्रवाइयों में गिना जाता है।