गगनयान की उल्टी गिनती शुरू! दो महीने में पहली परीक्षण उड़ान की तैयारी

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डेस्क : भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच रही हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने शनिवार को घोषणा की कि गगनयान-1 की पहली मानवरहित परीक्षण उड़ान अगले दो महीनों के भीतर आयोजित करने की योजना है। यह उड़ान आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित की जाएगी।

डॉ. नारायणन ने चेन्नई में श्री रामचंद्र उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र के दीक्षांत समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। इस परीक्षण उड़ान का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित अंतरिक्ष में भेजने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए विकसित की गई तकनीकों की क्षमता को परखना है।

व्योममित्र रोबोट करेगा अंतरिक्ष की यात्रा

गगनयान-1 एक मानवरहित परीक्षण मिशन होगा, जिसमें अर्ध-मानवाकार रोबोट ‘व्योममित्र’ को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा। इस मिशन में मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए तैयार किए गए एचएलवीएम-3 रॉकेट और स्वदेशी क्रू मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जाएगा।

इस परीक्षण के दौरान रॉकेट, क्रू मॉड्यूल और उससे जुड़ी विभिन्न प्रणालियों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। इससे भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने से पहले जरूरी तकनीकी जानकारियां और अनुभव प्राप्त होंगे।

कई महत्वपूर्ण परीक्षण पूरे

इसरो गगनयान मिशन की पहली परीक्षण उड़ान से पहले सुरक्षा और तकनीकी प्रणालियों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कई अहम परीक्षण कर चुका है। इनमें पैराशूट प्रणाली की जांच के लिए दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट भी शामिल है, जिसे भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से पूरा किया गया।

इसके अलावा क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को अलग करने, एपेक्स कवर के पृथक्करण तथा क्रू मॉड्यूल को सही स्थिति में लाने वाली प्रणाली के परीक्षण भी पूरे किए जा चुके हैं। इन सभी प्रक्रियाओं का उद्देश्य मिशन के दौरान संभावित जोखिमों को कम करना और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

तीन अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की योजना

गगनयान परियोजना के तहत भारत की योजना तीन अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की कक्षा में भेजने की है। प्रस्तावित मानवयुक्त मिशन में अंतरिक्ष यात्री लगभग तीन दिन तक अंतरिक्ष में रहेंगे। इसके बाद उन्हें सुरक्षित वापस लाकर भारतीय समुद्री क्षेत्र में उतारा जाएगा।

मानवयुक्त उड़ान से पहले अतिरिक्त मानवरहित परीक्षण मिशन भी आयोजित किए जाएंगे। इन परीक्षणों के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा, जीवन समर्थन प्रणाली, आपातकालीन बचाव व्यवस्था और पृथ्वी पर वापसी से जुड़ी तकनीकों को प्रमाणित किया जाएगा।

दूसरे अंतरिक्ष केंद्र से बढ़ेगी प्रक्षेपण क्षमता

इसरो प्रमुख ने तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के कुलशेखरपट्टिनम में विकसित हो रहे दूसरे अंतरिक्ष केंद्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2029-30 तक भारत की प्रक्षेपण क्षमता को बढ़ाकर सालाना 50 रॉकेट तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

इसके लिए श्रीहरिकोटा में अतिरिक्त प्रक्षेपण सुविधाओं और कुलशेखरपट्टिनम के अंतरिक्ष केंद्र को विकसित किया जा रहा है। कुलशेखरपट्टिनम केंद्र का उपयोग मुख्य रूप से छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों के लिए किया जाएगा।

इसरो के निजीकरण की अटकलों पर स्पष्टीकरण

डॉ. नारायणन ने इसरो के निजीकरण को लेकर लगाई जा रही अटकलों को भी खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसरो भारत सरकार का विभाग है और इसका निजीकरण नहीं किया जा रहा है। निजी कंपनियों तथा स्टार्टअप को अंतरिक्ष क्षेत्र में अवसर देने और प्रक्षेपण सुविधाओं के संचालन में उनकी भागीदारी बढ़ाने का उद्देश्य देश के अंतरिक्ष उद्योग को मजबूत करना है।

गगनयान मिशन की पहली मानवरहित उड़ान भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इसके सफल होने के बाद आगे के परीक्षणों और सुरक्षा मानकों के सत्यापन के आधार पर मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में प्रगति होगी।