डेस्क : यमन के हूती विद्रोही संगठन ने सऊदी अरब के मदीना क्षेत्र में ड्रोन भेजने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह प्रतिक्रिया सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के उस दावे के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने मदीना क्षेत्र के ऊपर एक ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया।
हूतियों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि यमन की सेना ने सऊदी अरब के आंतरिक क्षेत्र को निशाना बनाकर कोई सैन्य अभियान नहीं चलाया है। उन्होंने सऊदी गठबंधन के दावे को मनगढ़ंत और निराधार बताया।
इससे पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने घोषणा की थी कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने मदीना प्रांत के ऊपर हूतियों की ओर से भेजे गए एक मानवरहित विमान (ड्रोन) को सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में पहले से जारी सैन्य तनाव को और बढ़ा दिया है।
पवित्र शहरों को निशाना बनाने के आरोपों पर विवाद
मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में मक्का के बाद दूसरे स्थान पर है। यहां स्थित पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद (मस्जिद-ए-नबवी) में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इससे पहले भी सऊदी अरब की ओर से हूतियों पर मक्का और मदीना को निशाना बनाने के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन संगठन लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
हूती संगठन का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों तक सीमित है। संगठन ने यह भी कहा है कि वह अपने सैन्य अभियानों की जानकारी सार्वजनिक रूप से देता है।
क्षेत्रीय संघर्ष से बढ़ी चिंता
यह घटनाक्रम अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी व्यापक संघर्ष के बीच सामने आया है। हाल के दिनों में सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों को लेकर हमलों तथा जवाबी कार्रवाई के दावे सामने आए हैं।
यमन में हूती संगठन राजधानी सना सहित देश के बड़े उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण रखता है, जबकि सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का समर्थन करता है।
क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अस्थिरता से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल मदीना में कथित ड्रोन घटना को लेकर सऊदी गठबंधन के दावे और हूतियों के इनकार के बीच विरोधाभास बना हुआ है। स्वतंत्र रूप से घटना की पूरी पुष्टि सामने नहीं आई है।









