अगर आप अपना घर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए होम लोन लेने वाले हैं, तो केवल कम ईएमआई देखकर फैसला करना आपके लिए महंगा साबित हो सकता है। होम लोन लंबी अवधि की वित्तीय जिम्मेदारी होती है। ऐसे में लोन की अवधि, डाउन पेमेंट, ब्याज दर और अन्य खर्चों को नजरअंदाज करने से भविष्य में आपको लाखों रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पहली बार घर खरीदने वाले लोग अक्सर होम लोन लेते समय कुछ सामान्य गलतियां कर बैठते हैं। इन गलतियों से बचकर न केवल लोन का बोझ कम किया जा सकता है, बल्कि लंबे समय में ब्याज के रूप में होने वाले अतिरिक्त खर्च को भी बचाया जा सकता है।
1. जरूरत से ज्यादा लंबी अवधि का लोन लेना
लोन की अवधि जितनी लंबी होती है, मासिक ईएमआई उतनी ही कम हो जाती है। हालांकि, लंबी अवधि में कुल ब्याज का भुगतान काफी बढ़ जाता है। इसलिए लोन की अवधि ऐसी तय करनी चाहिए, जिसमें ईएमआई आपकी आय के अनुसार आसानी से संभाली जा सके और ब्याज का बोझ भी सीमित रहे।
2. कम डाउन पेमेंट करना
कम डाउन पेमेंट करने पर आपको बैंक से अधिक रकम उधार लेनी पड़ती है। इससे लोन की कुल राशि बढ़ जाती है और लंबे समय में ब्याज भी अधिक चुकाना पड़ता है। इसलिए अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार अधिक डाउन पेमेंट करना फायदेमंद हो सकता है, बशर्ते इससे आपकी बचत पूरी तरह खत्म न हो।
3. अतिरिक्त और छिपे खर्चों का हिसाब न रखना
घर खरीदते समय केवल होम लोन की ईएमआई का ही खर्च नहीं होता। रजिस्ट्रेशन फीस, स्टांप ड्यूटी, लोन प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस, मेंटेनेंस और अन्य खर्च भी बजट में शामिल होते हैं। इन खर्चों का पहले से अनुमान नहीं लगाने पर घर खरीदने के बाद आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
4. क्रेडिट स्कोर को नजरअंदाज करना
होम लोन लेने से पहले अपने क्रेडिट स्कोर पर ध्यान देना भी बेहद जरूरी है। अच्छा क्रेडिट स्कोर होने पर बेहतर ब्याज दर मिलने की संभावना बढ़ सकती है। वहीं, कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल की स्थिति में लोन महंगा पड़ सकता है, जिससे ईएमआई और कुल भुगतान दोनों बढ़ सकते हैं।
5. बैंक से मिलने वाली अधिकतम लोन राशि ले लेना
बैंक जितना अधिकतम लोन देने के लिए तैयार हो, उतनी पूरी राशि लेना हमेशा सही फैसला नहीं होता। भविष्य में मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई या अन्य जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है। इसलिए लोन की राशि उतनी ही रखें, जिसकी ईएमआई आप अपनी नियमित आय से बिना किसी परेशानी के चुका सकें।
20 साल की जगह 30 साल का लोन लेने पर बढ़ सकता है ब्याज
बेसिक होम लोन के सीईओ और को-फाउंडर अतुल मोंगा के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति 60 लाख रुपये का होम लोन 20 साल की बजाय 30 साल की अवधि के लिए लेता है, तो उसकी मासिक ईएमआई कम हो सकती है, लेकिन पूरी अवधि में चुकाया जाने वाला ब्याज काफी बढ़ सकता है। ऐसे में होम लोन लेते समय केवल ईएमआई पर ध्यान देने के बजाय कुल ब्याज, लोन की अवधि और अपनी भविष्य की वित्तीय स्थिति का भी आकलन करना जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सही होम लोन वही है, जिसकी ईएमआई आपकी आय और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। बेहतर वित्तीय योजना के साथ लिया गया लोन घर के सपने को पूरा करने में मदद कर सकता है, जबकि बिना योजना के लिया गया बड़ा लोन लंबे समय तक आर्थिक बोझ बन सकता है।







