होर्मुज जलडमरूमध्य के नए मार्गों पर ईरान-ओमान में सहमति, खाड़ी देशों को दी जाएगी जानकारी

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डेस्क : रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश और निकास के नए मार्गों को लेकर ईरान और ओमान के बीच सहमति बन गई है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच हुई चर्चा के बाद नए मार्गों के विवरण को सोमवार को मस्कट में होने वाली क्षेत्रीय बैठक में खाड़ी देशों के समक्ष रखा जाएगा। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शनिवार को यह जानकारी दी।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है।

इसी बीच, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान इंडिया टुडे को दिए विशेष साक्षात्कार में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि ब्रिक्स का गठन अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों की व्यवस्था का मुकाबला करने के उद्देश्य से हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी एक देश को अपनी इच्छा के अनुसार दूसरे देशों पर प्रतिबंध लगाने की स्थिति समाप्त करने के लिए ब्रिक्स देशों को वैकल्पिक व्यापार और सहयोग तंत्र विकसित करना चाहिए।

पेजेशकियन ने कहा कि ब्रिक्स देशों को आपसी सहयोग और समर्थन के जरिए एकतरफावाद का मुकाबला करना होगा। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच व्यापार और सहयोग ऐसा होना चाहिए, जो किसी एक देश द्वारा लगाए जाने वाले प्रतिबंधों से प्रभावित न हो।

पश्चिम एशिया पर ब्रिक्स में बनी सहमति

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंधों के सचिव सुधाकर डालेला ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच सहमति बनी है और संवाद एवं कूटनीति इस साझा दृष्टिकोण का केंद्र हैं।

मीडिया ब्रीफिंग में डालेला ने कहा कि ब्रिक्स में शामिल देशों की विकास यात्राएं और आर्थिक व्यवस्थाएं अलग-अलग हैं। ऐसे में किसी साझा निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले सभी देशों को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को रखने के लिए पर्याप्त अवसर देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारत ने ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में सभी देशों को पारदर्शी चर्चा के लिए मंच उपलब्ध कराया और यह सुनिश्चित किया कि सदस्य देश अपनी राष्ट्रीय स्थिति खुलकर रख सकें। इसके बाद साझा सहमति वाले क्षेत्रों की पहचान कर सामूहिक दृष्टिकोण तैयार किया गया।

डालेला ने कहा कि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर साझा दृष्टिकोण बनना संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष या संकट के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति ही स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता का रास्ता है।

नई दिल्ली घोषणा में तनाव पर चिंता

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नेताओं ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा 2026 को स्वीकार किया। घोषणा में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बढ़ते संघर्ष पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकतम संयम बरतने तथा ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जिनसे स्थिति और बिगड़ सकती है।

ब्रिक्स देशों ने नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान तथा संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रयास तेज करने पर जोर दिया।

घोषणा में अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। साथ ही, नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। ब्रिक्स देशों ने कहा कि सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में भी परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और निगरानी संबंधी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।