होर्मुज पर ईरान-ओमान में समझौता, अब अमेरिका-सऊदी के फैसले का इंतजार

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डेस्क : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और ओमान के बीच बड़ा समझौता होने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही और नेविगेशन को लेकर व्यवस्था पर सहमति बनाई है। हालांकि, इस समझौते की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि समझौते के तहत होर्मुज में बाहर से प्रवेश करने वाले व्यावसायिक जहाजों की व्यवस्था ईरान संभालेगा, जबकि खाड़ी की ओर से होर्मुज से बाहर जाने वाले जहाजों के नेविगेशन की जिम्मेदारी ओमान के पास होगी। दोनों देश जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक निर्धारित शिपिंग लाइन भी तैयार करेंगे, ताकि समुद्री मार्ग पर टक्कर जैसी घटनाओं का खतरा कम किया जा सके।

क्या जहाजों से लिया जाएगा सर्विस टैक्स?

समझौते के तहत जहाजों से किसी तरह की फीस या टैक्स लिए जाने को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ईरान पहले ही होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा के नाम पर ‘सर्विस टैक्स’ की बात करता रहा है। हालांकि, इस समझौते में फीस की व्यवस्था को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

समझौते का मकसद क्या?

ईरान और ओमान के बीच बनी व्यवस्था का उद्देश्य लंबे समय से जारी होर्मुज संकट को कम करना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य करने की दिशा में रास्ता खोलना बताया जा रहा है। तकनीकी पहलुओं पर काम पूरा होने के बाद दोनों देशों की ओर से औपचारिक दस्तावेज जारी किए जाने की बात कही गई है।

इससे पहले भी ईरान और ओमान के बीच होर्मुज में जहाजों के लिए रूट तय करने और जलमार्ग के प्रबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरें आई थीं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी दोनों देशों के बीच संभावित व्यवस्था का जिक्र हुआ था।

अब सबकी नजर अमेरिका पर

ईरान और ओमान के बीच समझौते के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सामान्य होगा या नहीं, इस पर अमेरिका का रुख अहम माना जा रहा है। ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के लिए कुछ अन्य शर्तें भी पूरी करनी होंगी। वहीं अमेरिका चाहता है कि युद्ध से पहले की स्थिति बहाल हो और जहाजों पर किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क न लगाया जाए।

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। इसके जरिए वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। तनाव के कारण जहाजों का बीमा महंगा हुआ है और कई कंपनियां इस रास्ते से गुजरने में जोखिम महसूस कर रही हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है।

ऐसे में ईरान और ओमान के बीच हुआ यह समझौता सिर्फ क्षेत्रीय समुद्री व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अमेरिका-ईरान तनाव के अगले चरण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।