थ जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र से अपना आखिरी एयरक्राफ्ट कैरियर USS George Washington हटाकर उसे मध्य पूर्व की ओर भेजने का फैसला किया है। अमेरिकी नौसेना की इस तैनाती को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर बढ़ते सैन्य फोकस से जोड़कर देखा जा रहा है।
USS George Washington फिलहाल जापान के योकोसुका में तैनात अमेरिकी नौसैनिक शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसके मध्य पूर्व जाने के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की स्थायी मौजूदगी पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
चीन को क्यों मिला रणनीतिक फायदा?
अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की एशिया से वापसी को चीन के लिए रणनीतिक अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका की सैन्य मौजूदगी में कमी ऐसे समय हुई है जब चीन दक्षिण चीन सागर और आसपास के विवादित क्षेत्रों में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया में अमेरिकी नौसैनिक शक्ति का अस्थायी खालीपन बीजिंग को क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका दे सकता है। खासकर जापान, फिलीपींस और अन्य अमेरिकी सहयोगी देशों के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय बन सकता है।
अमेरिका के सामने दो मोर्चों की चुनौती
USS George Washington को मध्य पूर्व भेजने का फैसला बताता है कि ईरान युद्ध के कारण अमेरिकी नौसेना के संसाधनों पर कितना दबाव बढ़ गया है। अमेरिका को एक तरफ ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान पर ध्यान देना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसे एशिया-प्रशांत में चीन को रोकने की अपनी रणनीति भी बनाए रखनी है।
USS George Washington को मध्य पूर्व में भेजने का उद्देश्य वहां लंबे समय से तैनात USS Abraham Lincoln को राहत देना भी है। Lincoln की तैनाती लंबे समय तक खिंचने के कारण अमेरिकी नौसेना के सामने चालक दल और संचालन संबंधी दबाव की खबरें भी सामने आई हैं।
जापान और फिलीपींस की बढ़ी चिंता
अमेरिका के एशिया से एयरक्राफ्ट कैरियर हटाने से उसके सहयोगी देशों में भी चिंता बढ़ सकती है। जापान और फिलीपींस जैसे देशों के लिए अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी चीन के खिलाफ सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हालांकि अमेरिका ने अपने सहयोगियों को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उसकी प्रतिबद्धता कमजोर नहीं हुई है। लेकिन एयरक्राफ्ट कैरियर की अनुपस्थिति को लेकर रणनीतिक बहस तेज हो गई है।
चीन के लिए मौका, अमेरिका के लिए चुनौती
ईरान युद्ध ने अमेरिका को अपनी सैन्य प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। मध्य पूर्व में बढ़ती जरूरतों के कारण एशिया में अमेरिकी सैन्य संसाधनों का पुनर्विन्यास चीन के लिए रणनीतिक अवसर बन सकता है।
यही वजह है कि USS George Washington का एशिया से निकलना सिर्फ एक सैन्य तैनाती में बदलाव नहीं, बल्कि अमेरिका-चीन शक्ति संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।








