नई दिल्ली : त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई किराए में मनमानी बढ़ोतरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि जो विमानन कंपनियां किराए से जुड़े नियमों और निर्देशों का पालन नहीं करती हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी उड़ानें रोक दी जाएं।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने बताया कि हवाई किराए को नियंत्रित करने के लिए भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नए नियम तैयार किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने बताया कि नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है और इसे करीब तीन सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा।
सात दिन में मसौदा सार्वजनिक करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तैयार किए जा रहे नियमों के मसौदे को सात दिनों के भीतर सार्वजनिक करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई एयरलाइन नियमों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने ऐसी स्थिति में उड़ान रोकने तक की कार्रवाई का संकेत दिया।
मनमाने किराए और शुल्क पर सवाल
मामले की सुनवाई सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की ओर से दाखिल याचिका पर हो रही है। याचिका में हवाई किराए और अन्य शुल्कों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक की जरूरत भी बताई है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने अदालत में कहा कि नए नियम लागू होने तक पुराने नियम ही प्रभावी हैं, लेकिन उनका प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि यात्रियों से मनमाना किराया और अन्य शुल्क वसूले जा रहे हैं।
तीन सप्ताह में अंतिम नियम तैयार करने का भरोसा
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिया कि नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तीन सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी। अदालत ने सीलबंद लिफाफे में पेश किए गए मसौदे को भी देखा और कहा कि इसमें एक व्यवस्था का सुझाव है, लेकिन नियामक को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
हवाई किराए को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी चिंता जता चुका है। मई में अदालत ने अलग-अलग एयरलाइंस द्वारा एक ही मार्ग पर एक ही दिन अलग-अलग किराया वसूले जाने का मुद्दा उठाते हुए किराए को तर्कसंगत बनाने और यात्रियों को राहत देने की बात कही थी।








