डेस्क : मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने मौजूदा दौर के सिनेमा और समाज की पसंद को लेकर बेबाक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि फिल्मों और गानों में बढ़ती अश्लीलता के लिए केवल निर्माता या कलाकारों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उनके मुताबिक असली सवाल यह है कि दर्शक ऐसे कंटेंट को पसंद क्यों करते हैं और उसे सफल क्यों बनाते हैं।
एक इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने ‘चोली के पीछे क्या है’ जैसे चर्चित गाने का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी गाने को लिखने, संगीत देने, गाने, फिल्माने और निर्देशित करने में कुछ ही लोग शामिल होते हैं। यदि कोई गाना बेहद लोकप्रिय हो जाता है, तो यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में दर्शकों ने उसे स्वीकार किया है। उनके अनुसार यही बात चिंता का विषय है।
सिनेमा समाज की नब्ज है
जावेद अख्तर ने कहा कि सिनेमा समाज की नब्ज की तरह है। जिस तरह शरीर में बुखार होने पर नब्ज में भी उसका असर दिखाई देता है, उसी तरह समाज की सोच और पसंद का प्रभाव सिनेमा पर पड़ता है। उनका कहना था कि जब समाज की पसंद और सोच बेहतर होगी, तब मनोरंजन का स्तर भी अपने आप सुधरेगा।
उन्होंने पुराने दौर की फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी समाज में ‘दो बीघा जमीन’, ‘बंदिनी’, ‘सुजाता’, ‘हीरा मोती’ और ‘मदर इंडिया’ जैसी फिल्में बनीं और दर्शकों ने उन्हें पसंद किया। ऐसे में सवाल उठता है कि समय के साथ दर्शकों की पसंद में इतना बदलाव क्यों आया कि हल्के या विवादित कंटेंट को भी बड़ी सफलता मिलने लगी।
दर्शकों की पसंद पर उठाया सवाल
जावेद अख्तर ने कहा कि यदि किसी आपत्तिजनक या अश्लील गाने को कुछ लोग मिलकर बनाते हैं, तो समस्या केवल उन लोगों तक सीमित नहीं है। असली समस्या तब पैदा होती है, जब करोड़ों लोग उसे पसंद करके सुपरहिट बना देते हैं। उन्होंने दर्शकों से सवाल किया कि यदि उन्हें बेहतर और गंभीर सिनेमा पसंद है, तो वे अच्छे कंटेंट वाली फिल्मों को भी उसी तरह सफलता क्यों नहीं देते।
उन्होंने फिल्मकार श्याम बेनेगल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने बेहतरीन फिल्में बनाईं, लेकिन समाज ने उस तरह के सिनेमा को उतनी बड़ी संख्या में नहीं देखा। जावेद अख्तर का कहना है कि सिनेमा को बेहतर बनाने में दर्शकों की पसंद और उनकी जिम्मेदारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।







