हरारे : जिम्बाब्वे में लेक करिबा में हुए भीषण फेरी हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। शनिवार को राहत और बचाव अभियान के दौरान 22 और शव बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार, हादसे के बाद से लापता लोगों की तलाश अब भी जारी है।
यह हादसा मंगलवार को लेक करिबा में उस समय हुआ, जब तेज हवाओं और उफनती लहरों के बीच यात्रियों से भरी फेरी पलट गई। अधिकारियों के मुताबिक, फेरी की क्षमता 90 यात्रियों की थी, लेकिन उसमें 114 वयस्कों के साथ पांच चालक दल के सदस्य और अज्ञात संख्या में बच्चे सवार थे।
हादसे में अधिकांश यात्री झील के आसपास रहने वाले ग्रामीण और मछली व्यापारी थे। जिम्बाब्वे की सिविल प्रोटेक्शन यूनिट के अनुसार, अब तक 77 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है।
ठंड के कारण शवों को निकालने में हो रही देरी
रेस्क्यू अभियान के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल जोसेफ मुचेचेसी ने बताया कि ठंडे मौसम के कारण शवों के पानी की सतह पर आने में समय लग रहा है। बचाव दल को उम्मीद है कि अभियान के दौरान सभी शवों को बरामद कर लिया जाएगा। हादसे के बाद करिबा के जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों के शवों की पहचान के लिए पहुंचे।
यात्रियों ने चालक से वापस लौटने की अपील की थी
हादसे से बचे यात्रियों ने बताया कि फेरी के रवाना होने के कुछ ही समय बाद उसमें पानी भरने लगा था। यात्रियों ने चालक से वापस लौटने की अपील भी की, लेकिन कुछ ही देर बाद नाव पलट गई। एक survivor के मुताबिक, कई यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनने की कोशिश की, लेकिन उन्हें उसका इस्तेमाल करने का सही तरीका पता नहीं था।
लेक करिबा जिम्बाब्वे और जाम्बिया की सीमा पर स्थित है और पानी की मात्रा के लिहाज से यह दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील है। पुलिस के अनुसार, यह हादसा जिम्बाब्वे की सबसे घातक नौका दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है।








