जन्माष्टमी पर पीएम मोदी का संदेश- श्रीकृष्ण की शिक्षाएं मानवता का निरंतर मार्गदर्शन करती हैं

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नई दिल्ली :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देशवासियों को जन्माष्टमी के पावन पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए कहा कि उनके दिव्य संदेशों में निहित निष्काम कर्म की प्रेरणा मानवता का निरंतर मार्गदर्शन करती रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संदेश में कहा, “आप सभी को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेशों में निष्काम कर्म की गहरी प्रेरणा निहित है, जो निरंतर मानवता का मार्गदर्शन करती रही है।” उन्होंने कामना की कि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और आराधना को समर्पित यह पावन अवसर सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का संचार करे। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश का समापन “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष के साथ किया।

देशभर में श्रद्धा और उल्लास का माहौल

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी पर शुक्रवार को देशभर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने मंदिरों में पहुंचकर मंगला आरती, विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। कृष्ण भक्ति में डूबे श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया।

दिल्ली में ईस्ट ऑफ कैलाश और द्वारका सेक्टर-13 स्थित इस्कॉन मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंगला आरती में शामिल हुए। मंदिरों में विशेष पूजा और आरती के दौरान भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।

मथुरा में जन्मभूमि मंदिर में विशेष आयोजन

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में जन्माष्टमी को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं ने मंगला आरती और विशेष पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की भारी भीड़ रही।

श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में झूमते और नृत्य करते नजर आए। मथुरा के विभिन्न मंदिरों में भी धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। जन्माष्टमी के अवसर पर शहर का वातावरण पूरी तरह कृष्णमय नजर आया।

कृष्ण जन्मोत्सव का धार्मिक महत्व

जन्माष्टमी को भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे जन्माष्टमी, कृष्ण जन्माष्टमी और गोकुलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।

जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। देशभर में श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।