जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण को उनके प्रिय व्यंजनों का भोग लगाकर पूजा-अर्चना करते हैं। माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों के साथ पंचमेवा से बना पाग भी भगवान श्रीकृष्ण को भोग में अर्पित किया जा सकता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होता है और इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है।
पंचमेवा पाग बनाने के लिए सामग्री
- 1 कप मखाने
- ¼ कप बादाम
- ¼ कप काजू
- ¼ कप अखरोट
- 2 बड़े चम्मच किशमिश
- ½ कप पिसी हुई चीनी या बूरा
- 2-3 बड़े चम्मच देशी घी
- ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
- 1-2 बड़े चम्मच दूध
- थोड़े से केसर के धागे, इच्छानुसार
पंचमेवा पाग बनाने की विधि
सबसे पहले एक कड़ाही में थोड़ा सा देशी घी गर्म करें। इसमें मखाने डालकर धीमी आंच पर कुरकुरे होने तक भून लें। इसके बाद बादाम, काजू और अखरोट को भी हल्का सुनहरा होने तक भून लें। ध्यान रखें कि मेवों को ज्यादा न भूनें, वरना उनका स्वाद कड़वा हो सकता है।
अब भुने हुए मखाने और मेवों को ठंडा करके दरदरा पीस लें। इसमें किशमिश डालकर अच्छी तरह मिला लें।
इसके बाद कड़ाही में दोबारा थोड़ा सा घी डालें और तैयार पंचमेवा मिश्रण को कुछ मिनट धीमी आंच पर भूनें। जब मेवों से अच्छी खुशबू आने लगे तो गैस बंद कर दें।
अब इसमें बूरा या पिसी हुई चीनी, इलायची पाउडर और केसर डालकर अच्छी तरह मिलाएं। मिश्रण को बांधने के लिए आवश्यकता के अनुसार थोड़ा-सा दूध डालें। ध्यान रखें कि दूध बहुत अधिक न डालें, वरना पाग जमने में परेशानी हो सकती है।
तैयार मिश्रण को घी लगी प्लेट या थाली में फैलाकर हल्का दबा दें। इसे कुछ देर ठंडा होने दें। जब मिश्रण अच्छी तरह जम जाए तो इसे छोटे-छोटे टुकड़ों या मनचाहे आकार में काट लें।
कान्हा को ऐसे लगाएं भोग
जन्माष्टमी की पूजा के बाद पंचमेवा पाग को भगवान श्रीकृष्ण के भोग में शामिल करें। भोग अर्पित करते समय श्रद्धा और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। मान्यता है कि भगवान को प्रेम और भक्ति से अर्पित किया गया भोग भक्त के जीवन में सुख और सकारात्मकता लेकर आता है।
पंचमेवा पाग में मखाने और विभिन्न सूखे मेवों का प्रयोग इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर घर में तैयार यह प्रसाद परिवार के सदस्यों और भक्तों में बांटकर पर्व की खुशी साझा की जा सकती है।
ध्यान रखें: प्रसाद बनाते समय सामग्री की शुद्धता और अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा के अनुसार सामग्री का चयन करें।








