डेस्क : देश के कर संग्रह के मोर्चे पर जुलाई में मजबूत तस्वीर सामने आई है। जुलाई 2026 में सकल वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी संग्रह बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। पिछले वर्ष जुलाई की तुलना में इस बार जीएसटी संग्रह में 15.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कर संग्रह में यह उछाल देश में आर्थिक गतिविधियों और कारोबारी लेनदेन में मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में कुल सकल जीएसटी संग्रह 2,11,205 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल जुलाई में सरकार को जीएसटी से करीब 1.83 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस तरह एक साल में जीएसटी संग्रह में करीब 28 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
आयात से मिलने वाले कर में भी तेज बढ़ोतरी
जुलाई के जीएसटी संग्रह में आयात से प्राप्त राजस्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आंकड़ों के मुताबिक, आयात से मिलने वाला जीएसटी राजस्व सालाना आधार पर करीब 28.8 प्रतिशत बढ़कर 66,511 करोड़ रुपये हो गया। घरेलू स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति से प्राप्त राजस्व में भी वृद्धि दर्ज की गई।
जून के मुकाबले भी बेहतर रहा जुलाई
जुलाई में जीएसटी संग्रह जून के मुकाबले भी अधिक रहा। जून 2026 में सकल जीएसटी संग्रह करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये रहा था। जुलाई में इसमें करीब 16 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और संग्रह 2.11 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
लगातार मजबूत जीएसटी संग्रह को अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। घरेलू कारोबार, खपत और आयात से जुड़ी गतिविधियों में तेजी का असर कर संग्रह पर दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही जीएसटी व्यवस्था में बेहतर अनुपालन और कर चोरी पर लगाम का असर भी संग्रह में बढ़ोतरी के रूप में सामने आ रहा है।
जुलाई में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी संग्रह सरकार के राजस्व मोर्चे के लिए भी महत्वपूर्ण है। लगातार बेहतर कर संग्रह से केंद्र और राज्यों दोनों की राजस्व स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।








