नई दिल्ली : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत अब केवल घरेलू जरूरतों के लिए उत्पादन करने की सोच से आगे बढ़कर वैश्विक बाजार के लिए विनिर्माण करने वाले देश के रूप में उभर रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गोयल ने कहा कि इसका उद्देश्य केवल आयात पर निर्भरता कम करना नहीं, बल्कि भारत को दुनिया के उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद बनाने में सक्षम बनाना था।
गोयल ने कहा कि वर्ष 2014 में जब ‘मेक इन इंडिया’ की शुरुआत हुई थी, तब भारत की विनिर्माण क्षमता को लेकर कई सवाल उठाए जाते थे और देश में इस्तेमाल होने वाले अनेक उत्पाद आयात किए जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे भारत की कल्पना की थी, जहां देश में बने उत्पाद पूरी दुनिया में इस्तेमाल हों और अपनी गुणवत्ता के लिए ‘मेड इन इंडिया’ की पहचान बनाएं।
उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ की उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने देश के स्टार्टअप संस्थापकों, उद्यमियों, निर्माताओं, नवोन्मेषकों और निर्यातकों में यह विश्वास पैदा किया है कि भारत उत्पादन, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम है।
गोयल के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में अब तक का सर्वाधिक 94.53 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया। वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच देश में कुल 843 अरब डॉलर का एफडीआई आया।
उन्होंने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं को भी विनिर्माण विस्तार में महत्वपूर्ण बताया। 31 मार्च 2026 तक पीएलआई योजनाओं के तहत 2.40 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश, 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन एवं बिक्री और 15.2 लाख करोड़ रुपये का निर्यात दर्ज किया गया। इन योजनाओं से 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का दावा किया गया।
गोयल ने राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहरों के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कारोबार सुगमता से जुड़े सुधारों से नियमों को सरल बनाने और अनुपालन का बोझ घटाने में मदद मिली है। विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधारों से निवेश और विनिर्माण के नए अवसर भी तैयार हुए हैं।
उन्होंने छोटे कारोबारियों के लिए ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) की भूमिका का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, ओएनडीसी के माध्यम से अब तक 470 करोड़ से अधिक ऑर्डर किए जा चुके हैं।
गोयल ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के अगले चरण में भारत की महत्वाकांक्षा और व्यापक होगी। देश का लक्ष्य वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना और वैश्विक उत्पादन एवं आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि 12 साल की यह यात्रा केवल एक पड़ाव नहीं, बल्कि देश की क्षमताओं में विश्वास और लगातार किए गए सुधारों का परिणाम है।








