जयशंकर ने जी-20 में उठाई वैश्विक शांति की आवाज, ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला पर दिया जोर

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डेस्क : विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में वैश्विक संघर्षों को समाप्त करने के लिए सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने मौजूद बड़े संघर्षों का समाधान सैन्य रास्ते से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तलाशना होगा।

अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एएनआई से बातचीत में जयशंकर ने बताया कि बैठक में भू-राजनीतिक चुनौतियों, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

संघर्षों के समाधान के लिए कूटनीति जरूरी

जयशंकर ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया दो बड़े संघर्षों के वैश्विक प्रभावों का सामना कर रही है। ऐसे हालात में सैन्य टकराव को बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक रास्ता तलाशना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत लगातार शांति और बातचीत के माध्यम से विवादों के समाधान की वकालत करता रहा है।

ऊर्जा बाजारों के राजनीतिकरण पर जताई चिंता

बैठक में ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि ऊर्जा बाजारों में कृत्रिम बाधाएं और ऊर्जा आपूर्ति को राजनीतिक हितों से जोड़ना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। इसका सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश ऊर्जा की कमी और आपूर्ति में बाधाओं का खामियाजा भुगत रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने काला सागर क्षेत्र में अनाज की आपूर्ति में आ रही रुकावटों और फारस की खाड़ी तथा लाल सागर क्षेत्र में तनाव के कारण उर्वरकों की उपलब्धता पर पड़ रहे प्रभावों का भी उल्लेख किया।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता पर जोर

जी-20 बैठक के अंतिम सत्र में जयशंकर ने वैश्विक उत्पादन और विनिर्माण व्यवस्था में विविधता लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था किसी एक देश या भौगोलिक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने के लिए उत्पादन के विभिन्न केंद्र विकसित करने, औद्योगिक विकास के अधिकार को बढ़ावा देने और प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाली अनुचित व्यापारिक गतिविधियों का विरोध करने की बात कही।

जयशंकर ने यह भी कहा कि वैश्विक बाजारों को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखने और पारदर्शी व्यापार व्यवस्था विकसित करने के लिए जी-20 देशों को मिलकर काम करना चाहिए।

अमेरिकी विदेश मंत्री से भी हुई चर्चा

बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की। उन्होंने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं और महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को आवश्यक बताया। जयशंकर ने बैठक से इतर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात की। इस दौरान यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत ने जी-20 मंच के माध्यम से एक बार फिर स्पष्ट किया कि वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए देशों के बीच सहयोग, संवाद और संतुलित व्यापार व्यवस्था बेहद जरूरी है।