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नई दिल्ली: ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों के बाद दिल्ली में इसके काउंटर-टेररिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक चल रही है। इसमें भारत ने गुरुवार को शुरू में ही साफ कर दिया कि आतंकवाद को संरक्षण और समर्थन देने वाले देशों को जिम्मेदार ठहराना जरूरी है। निशाना सीधा पाकिस्तान है; और भारत की चिंता से सहमति जताने में रूस और इंडोनेशिया ने जरा भी देरी नहीं की है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख पर मुहर
भारत ने ब्रिक्स काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप (CTWG) की मीटिंग में साफ किया कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बहुत ही जरूरी है। क्योंकि, अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना आतंकवादी संगठनों की टेरर फाइनेंसिंग ,रेडिकलाइजेशन,मनी लॉन्ड्रिंग और नई-नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर रोक लगाना मुश्किल है।
आतंकवाद-विरोधी रणनीति को बेहतर करने पर काम
ET की एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रिक्स काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप (CTWG) अब इसपर काम कर रहा है कि यह अपनी आतंकवाद-विरोधी रणनीति को किस तरह से और भी बेहतर कर सकता है।
इसके लिए 11 सदस्यीय ग्रुप में आतंकवादी संगठनों की ओर से साइबर खतरे, फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से जुड़ी जानकारियां और चुनौतियों को आपस में साझा करने के तरीके को लेकर विचार कर रहे हैं।
रूस और इंडोनेशिया कर रहे रणनीतिक पहल की अगुवाई
भारत के नजरिए से सबसे बड़ी बात ये है कि ब्रिक्स के आतंकवाद-विरोधी इस रणनीतिक पहल की अगुवाई रूस और इंडोनेशिया जैसे देश कर रहे हैं।
दोनों ही देशों ने सीमापार से आतंकवाद और सीमापार मौजूद आतंकवादी ढांचों को लेकर भारत की चिंताओं का खुलकर समर्थन किया है।
रूस आतंकवाद के खिलाफ हमेशा से भारत के साथ खड़ा रहा है।
इसमें इंडोनेशिया का भी शामिल होना बहुत बड़ी बात है, जो ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) में कश्मीर मुद्दे पर भी पाकिस्तान के रवैए को लेकर अपनी आपत्तियां जाहिर कर चुका है।
मुस्लिम मुल्कों के सामने भी बेनकाब पाकिस्तान
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है।
ओआईसी में ही नहीं, ब्रिक्स के सदस्यों में इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब,मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे पांच बड़े मुस्लिम मुल्क भी शामिल हैं।
इनके अलावा ब्रिक्स के पार्टनर देशों में मलेशिया जैसा मुस्लिम बहुल देश भी शामिल है।
इतने सारे मुस्लिम देशों की मौजूदगी में भारत ने जिस तरह से क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म का मुद्दा उठाया है और उसपर रोकथाम के उपाय खोजे जा रहे हैं, उससे पाकिस्तान मुस्लिम देशों के सामने ही एक बार फिर से बेनकाब हुआ है।
ब्रिक्स काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप में जैसे-जैसे आतंकवाद पर लगाम कसने के तरीकों पर बात बढ़ेगी और रूस और इंडोनेशिया के जोर पर भारत की चिंताओं को उसमें शामिल किया जाएगा, पाकिस्तान के कारनामों की परतें खुलती चली जाएंगी।
ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक में ही बन गया आधार
ब्रिक्स काउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप में आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त तरीका अपनाने पर काम यूं ही नहीं शुरू हुआ है।
इसका आधार हाल ही में संपन्न ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में तैयार हुआ था।
यहां एक आतंकवाद-विरोधी ठोस घोषणापत्र को मंजूर किया गया, जिसमें भारत के सीमा-पार से जुड़े खतरों से जुड़ीं चिंताएं शामिल की गईं।
ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों ने सभी तरह के आतंकवाद की निंदा करते हुए इसे आपराधिक और अनुचित ठहराया,चाहे उनका मकसद कुछ भी हो। इसे भारत के रुख पर मुहर की तरह देखा जा रहा है।
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