महानता का आधार है विनम्रता” — मुनि श्री तत्व रुचि जी “तरुण

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जयपुर, 22 मई। अजमेर रोड स्थित टैगोर नगर के नवोदित अणुव्रत भवन में चल रही आध्यात्मिक प्रवचन माला के अंतर्गत शुक्रवार को ‘धर्म का मूल है — विनय’ विषय पर विशेष प्रवचन आयोजित हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री तत्व रुचि जी “तरुण” ने विनम्रता को जीवन की महानता और धर्म का आधार बताया।

अपने प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि जैसे वृक्ष के तने, शाखाएं, पत्ते, फूल और फल का आधार उसकी जड़ होती है, उसी प्रकार धर्म और ध्यान का मूल आधार विनय है। विनम्रता, विनय का व्यावहारिक स्वरूप है और व्यक्ति की महानता उसी से प्रकट होती है।

उन्होंने कहा कि विनम्रता ऐसा गुण है जो अन्य सभी गुणों को विकसित और पुष्पित करता है। जीवन में विकास और सफलता का वरदान विनम्रता से प्राप्त होता है, जबकि अहंकार पतन और अभिशाप का कारण बनता है। इसलिए सफलता के लिए अभिमान छोड़कर विनम्रता को अपनाना आवश्यक है।

इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा कि विनम्रता जीवन का वास्तविक श्रृंगार है। व्यक्ति लोकप्रियता और सम्मान विनम्रता से प्राप्त करता है, अहंकार से नहीं। उन्होंने कहा कि अभिमान देवताओं को भी दानव बना देता है, जबकि विनम्रता साधारण मनुष्य को भी देवतुल्य बना सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि विनम्रता व्यक्ति को केवल सफलता ही नहीं, बल्कि विशिष्टता भी प्रदान करती है। विनम्र व्यक्ति ही अपनी कमियों और भूलों को पहचानकर उनका परिष्कार कर सकता है।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान वासुपूज्य प्रभु की स्तुति में भक्ति गीत के संगान से हुई। इस दौरान प्रेक्षाध्यान एवं जप अनुष्ठान के प्रयोग भी करवाए गए। अंत में मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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