कम ईएमआई देखकर न करें फैसला, खरीदारी से पहले जानें असली लागत

0

टीवी, स्मार्टफोन, लैपटॉप, फर्नीचर या कोई महंगा घरेलू सामान खरीदते समय पूरी रकम एक साथ चुकाना हर किसी के बजट में संभव नहीं होता। ऐसे में क्रेडिट कार्ड ईएमआई और पर्सनल लोन जैसे विकल्प लोगों को राहत देते हैं। हालांकि, केवल कम ईएमआई देखकर फैसला करना जेब पर भारी पड़ सकता है। कम मासिक किस्त का मतलब हमेशा कम खर्च नहीं होता। ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी और लोन की अवधि मिलकर किसी खरीदारी की वास्तविक लागत तय करते हैं।

क्रेडिट कार्ड ईएमआई में अलग से लोन की जरूरत नहीं

क्रेडिट कार्ड पर ईएमआई की सुविधा उपलब्ध होने पर बड़ी खरीदारी को कई महीनों की किस्तों में बांटा जा सकता है। इसके लिए अलग से लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ती। टीवी, मोबाइल, लैपटॉप, फर्नीचर और होम अप्लायंस जैसी वस्तुओं की खरीदारी में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

कई बैंक और ऑनलाइन स्टोर नो-कॉस्ट ईएमआई का विकल्प भी देते हैं। हालांकि, ऐसे ऑफर को स्वीकार करने से पहले उसकी शर्तों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है। कुछ मामलों में प्रोसेसिंग फीस और उस पर जीएसटी देना पड़ सकता है। इसके अलावा ईएमआई लेने पर कैशबैक या तत्काल डिस्काउंट का लाभ भी खत्म हो सकता है। इसलिए केवल नो-कॉस्ट ईएमआई देखकर निर्णय लेने के बजाय यह देखना चाहिए कि पूरी अवधि में कुल कितनी रकम चुकानी होगी।

बड़ी रकम के लिए पर्सनल लोन भी विकल्प

अगर खरीदारी की रकम अधिक है या जरूरत ऐसी है जिसे सीधे क्रेडिट कार्ड के जरिए पूरा करना संभव नहीं है, तो पर्सनल लोन एक विकल्प हो सकता है। इसकी ब्याज दर ग्राहक की आय, क्रेडिट हिस्ट्री और पहले से चल रहे कर्ज जैसी कई बातों पर निर्भर कर सकती है।

लोन की अवधि भी कुल खर्च को प्रभावित करती है। लंबी अवधि चुनने पर मासिक ईएमआई कम हो जाती है, लेकिन अधिक समय तक ब्याज चुकाने के कारण कुल भुगतान बढ़ सकता है। इसके अलावा पर्सनल लोन लेते समय प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क की भी जानकारी पहले लेनी चाहिए।

कम ईएमआई के बजाय कुल भुगतान देखें

मान लीजिए एक विकल्प में मासिक ईएमआई कम है, लेकिन भुगतान की अवधि अधिक है। दूसरी ओर, दूसरे विकल्प में ईएमआई कुछ ज्यादा है, लेकिन कर्ज कम समय में समाप्त हो जाता है। ऐसी स्थिति में कम ईएमआई वाला विकल्प पहली नजर में सस्ता दिखाई दे सकता है, जबकि पूरी अवधि में उस पर अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है।

इसलिए किसी भी विकल्प को चुनने से पहले ब्याज दर, कुल भुगतान, प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी, लोन की अवधि और प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर शुल्क की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।

क्रेडिट कार्ड की उपलब्ध लिमिट भी रखें ध्यान में

बड़ी खरीदारी को क्रेडिट कार्ड पर ईएमआई में बदलने से कार्ड की उपलब्ध क्रेडिट लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो सकता है। इससे क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है। खासकर उन लोगों के लिए यह बात महत्वपूर्ण है, जिनके दूसरे क्रेडिट कार्डों पर भी बकाया राशि चल रही हो।

वहीं, अगर क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल समय पर चुकाने के बजाय केवल न्यूनतम देय राशि का भुगतान किया जाता है, तो ब्याज का बोझ काफी बढ़ सकता है। इसलिए ईएमआई लेने से पहले अपनी भुगतान क्षमता और मौजूदा देनदारियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

फैसला कुल लागत के आधार पर करें

छोटी खरीदारी के लिए कम शुल्क वाली वास्तविक नो-कॉस्ट ईएमआई सुविधाजनक हो सकती है, जबकि बड़ी रकम के मामले में कम ब्याज और कम शुल्क वाला पर्सनल लोन अधिक उपयुक्त हो सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला केवल ईएमआई की रकम देखकर नहीं करना चाहिए। दोनों विकल्पों में ब्याज, शुल्क और पूरी अवधि में होने वाले कुल भुगतान की तुलना करने के बाद ही निर्णय लेना बेहतर है।