आजकल बच्चों की पसंद में कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस और तरह-तरह के मीठे पेय आसानी से शामिल हो गए हैं। पार्टी हो, बाहर खाना हो या घर में मेहमान आएं—कोल्ड ड्रिंक बच्चों के हाथ में नजर आ ही जाती है। कई बच्चे तो इसे अपनी रोजमर्रा की आदत बना लेते हैं।
माता-पिता जब इस आदत को छुड़ाने की कोशिश करते हैं तो अक्सर बच्चे जिद करने लगते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि बच्चे को कोल्ड ड्रिंक से दूर कैसे किया जाए, बिना हर दिन घर में इसे लेकर लड़ाई किए?
इसका जवाब है—बच्चे की पसंद को अचानक रोकने के बजाय धीरे-धीरे उसकी आदत बदलना।
सबसे पहले समझें कि बच्चा कोल्ड ड्रिंक क्यों मांगता है
बच्चों को मीठा स्वाद पसंद होता है। इसके अलावा टीवी, विज्ञापन, दोस्तों और आसपास के माहौल का भी उनकी पसंद पर असर पड़ता है। कई बार बच्चे प्यास लगने पर पानी की जगह कोल्ड ड्रिंक मांगने लगते हैं।
इसलिए केवल यह कहना कि “कोल्ड ड्रिंक खराब है, इसे मत पियो” हमेशा प्रभावी नहीं होता। बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि प्यास बुझाने के लिए पानी सबसे बेहतर विकल्प है और मीठे पेय रोजाना पीने की चीज नहीं हैं।
एकदम से बंद करने के बजाय धीरे-धीरे कम करें
अगर बच्चा रोज कोल्ड ड्रिंक पीता है तो अचानक पूरी तरह बंद कर देना उसके लिए मुश्किल हो सकता है। शुरुआत में इसकी मात्रा और आवृत्ति कम करें।
अगर बच्चा रोज दो बार पीता है, तो पहले इसे एक बार करें। फिर इसे रोज की जगह सप्ताह में कुछ दिनों तक सीमित करें। धीरे-धीरे बच्चे की स्वाद की आदत भी बदलने लगेगी।
घर में कोल्ड ड्रिंक का स्टॉक न रखें
बच्चों की आदत बदलने में घर का माहौल बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर फ्रिज खोलते ही कोल्ड ड्रिंक दिखाई देगी तो बच्चा उसे मांग सकता है।
इसलिए घर में इसे नियमित रूप से रखने की बजाय पानी, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी या बिना अतिरिक्त चीनी वाले अन्य विकल्प उपलब्ध रखें।
पानी को भी बनाएं बच्चे की पसंद
बच्चों को सादा पानी कई बार बोरिंग लगता है। आप पानी को आकर्षक तरीके से पेश कर सकते हैं। सुंदर बोतल, पसंदीदा ग्लास या पानी पीने का छोटा-सा रूटीन बच्चे को पानी की आदत डालने में मदद कर सकता है।
गर्मी के मौसम में घर का बना नींबू पानी या छाछ भी अच्छा विकल्प हो सकता है। ध्यान रखें कि पेय में अतिरिक्त चीनी का इस्तेमाल कम से कम हो।
माता-पिता खुद भी मिसाल बनें
बच्चे वही आदतें जल्दी सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। अगर माता-पिता खुद हर दिन कोल्ड ड्रिंक पीते हैं और बच्चे को कहते हैं कि “तुम मत पियो”, तो बच्चे के लिए उस बात को स्वीकार करना मुश्किल होगा।
इसलिए बदलाव की शुरुआत पूरे परिवार से करना बेहतर है। घर में नियम हो कि मीठे पेय रोजमर्रा की आदत नहीं, कभी-कभार की चीज हैं।
बच्चे को डांटें नहीं, समझाएं
“तुम्हें कुछ समझ नहीं आता”, “इतनी कोल्ड ड्रिंक क्यों पीते हो?” जैसे वाक्य बच्चे को जिद्दी बना सकते हैं।
इसके बजाय सरल भाषा में बताएं कि ज्यादा मीठे पेय रोज पीना अच्छी आदत नहीं है और शरीर को रोजाना पानी और पौष्टिक चीजों की जरूरत होती है।
बच्चे को निर्णय लेने में भी शामिल करें। उदाहरण के लिए पूछें—“आज नींबू पानी पियोगे या छाछ?” जब बच्चे को विकल्प मिलता है तो उसे ऐसा नहीं लगता कि उसकी पसंद पूरी तरह छीन ली गई है।
इनाम के तौर पर भी कोल्ड ड्रिंक न दें
कई माता-पिता अनजाने में कहते हैं—“होमवर्क कर लो, फिर कोल्ड ड्रिंक मिलेगी।” इससे बच्चे के दिमाग में कोल्ड ड्रिंक एक इनाम बन जाती है।
इसके बजाय बच्चे को किसी खेल, आउटडोर एक्टिविटी, पसंदीदा कहानी या परिवार के साथ समय बिताने जैसे दूसरे तरीकों से प्रोत्साहित करें।
बाहर खाने पर भी पहले से नियम तय करें
रेस्तरां या पार्टी में बच्चे को कोल्ड ड्रिंक की इच्छा होना स्वाभाविक है। ऐसे समय पर हर बार सख्ती करने की बजाय पहले से परिवार का नियम तय करें।
बच्चे को समझाएं कि रोजाना मीठे पेय नहीं लिए जाएंगे और कभी-कभार बाहर होने वाले अवसर अलग हैं। इससे बच्चा प्रतिबंध को सजा की तरह नहीं देखेगा।
असली लक्ष्य सिर्फ कोल्ड ड्रिंक छुड़ाना नहीं है
बच्चे की कोल्ड ड्रिंक की आदत छुड़ाने का मतलब केवल एक पेय को उसकी जिंदगी से हटाना नहीं है। असली लक्ष्य है उसे स्वस्थ पेय और खान-पान की आदतों का महत्व समझाना।
जब बच्चा पानी, घर के बने पेय और पौष्टिक विकल्पों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने लगेगा, तो धीरे-धीरे कोल्ड ड्रिंक की मांग भी कम हो सकती है।
याद रखें
बच्चों की आदतें आदेश से कम और उदाहरण से ज्यादा बदलती हैं।
इसलिए अगली बार जब बच्चा कोल्ड ड्रिंक मांगे तो तुरंत डांटने के बजाय उससे बात कीजिए, विकल्प दीजिए और खुद भी वही आदत अपनाइए। क्योंकि बच्चे को स्वस्थ बनाना सिर्फ उसकी प्लेट बदलने से नहीं, पूरे परिवार की दिनचर्या बदलने से शुरू होता है।








