डेस्क : भारत ने बुधवार को अपने क्वाड साझेदार देशों अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। चारों देशों ने क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच आसियान की एकता और केंद्रीय भूमिका के लिए अपना अटूट समर्थन जताया।
मनीला में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने हिस्सा लिया। यह बैठक मई के अंत में नई दिल्ली में हुई पिछली बैठक के बाद आयोजित की गई।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में क्वाड देशों ने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और क्षेत्रीय शासन व्यवस्था में आसियान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
संयुक्त बयान में कहा गया कि चारों देश क्षेत्र की सफलता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और आसियान तथा उसके सदस्य देशों के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। मंत्रियों ने क्षेत्रीय चुनौतियों की समीक्षा करते हुए आसियान के हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण को व्यावहारिक रूप से लागू करने के तरीकों पर चर्चा की।
बैठक में समुद्री और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि एवं सुरक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ मानवीय सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा कि क्वाड विदेश मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति और हाल के घटनाक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने नई दिल्ली बैठक के परिणामों को आगे बढ़ाने और आसियान की केंद्रीय भूमिका को मान्यता देते हुए स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि मनीला बैठक ने यह स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में आसियान की प्राथमिकताओं और केंद्रीय भूमिका को समर्थन देने के लिए मजबूत सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान कानून के शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा दृष्टि रखते हैं।
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने भी क्षेत्रीय प्रगति के प्रति क्वाड की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। जापानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंत्रियों ने स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपदा राहत सहित विभिन्न प्राथमिक क्षेत्रों में ठोस सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
बैठक के दौरान पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर समेत हिंद-प्रशांत और पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा हुई। मोतेगी ने बलपूर्वक या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास का कड़ा विरोध किया। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों सहित निर्यात प्रतिबंधों को लेकर गंभीर चिंता जताई और उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने इस वर्ष के अंत में प्रस्तावित अगले क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन और विदेश मंत्रियों की बैठक के आयोजन की उम्मीद भी जताई।









