मानव तस्करी और अवैध प्रवासन के खिलाफ जी-7 का संयुक्त अभियान


एवियां : जी-7 देशों के नेताओं ने मानव तस्करी और प्रवासी तस्करी (माइग्रेंट स्मगलिंग) के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कार्रवाई तेज करने का संकल्प लिया है। नेताओं ने अवैध प्रवासन और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय अपराधों से लाभ कमाने वाले संगठित आपराधिक गिरोहों को समाप्त करने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

यह संकल्प फ्रांस के एवियां में आयोजित 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में पारित एक घोषणा-पत्र में व्यक्त किया गया। यह घोषणा इटली के अपुलिया (2024) और कनाडा के कनानास्किस (2025) शिखर सम्मेलनों में किए गए वादों की निरंतरता है। इस घोषणा का समर्थन जी-7 के साझेदार देशों केन्या और दक्षिण कोरिया ने भी किया।

घोषणा-पत्र में नेताओं ने प्रवासी तस्करी और मानव तस्करी को गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराध बताया, जो देशों के अपनी सीमाओं पर नियंत्रण के संप्रभु अधिकार को चुनौती देते हैं तथा असंख्य लोगों को शोषण, उत्पीड़न और जानलेवा परिस्थितियों के जोखिम में डालते हैं।

घोषणा में कहा गया, “हम, जी-7 देशों के नेता, प्रवासियों की तस्करी को रोकने और उसका मुकाबला करने के अपने सतत प्रयासों की पुनः पुष्टि करते हैं।”

नेताओं ने स्पष्ट किया कि संगठित अवैध प्रवासन पर अंकुश लगाने के साथ-साथ उन प्रवासियों, शरणार्थियों और जबरन विस्थापित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है, जो मानव तस्करों और अपराधी नेटवर्कों के शोषण के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं।

इसी उद्देश्य से संबंधित मंत्रियों को प्रवासी तस्करी की रोकथाम और उससे मुकाबले के लिए तैयार जी-7 कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।

घोषणा-पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि जी-7 देश मानव तस्करी और प्रवासी तस्करी में शामिल व्यक्तियों तथा संगठनों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने और अन्य दंडात्मक उपायों को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

नेताओं ने विशेष चिंता व्यक्त की कि आपराधिक संगठन अब ऑनलाइन मंचों और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके अवैध प्रवासन को बढ़ावा दे रहे हैं। कनाडा की जी-7 अध्यक्षता के दौरान किए गए संकल्पों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि तस्करी से जुड़े प्रचार और गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके।

जी-7 नेताओं ने यह भी माना कि समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब प्रवासन के मूल कारणों को संबोधित किया जाए। इसके लिए प्रवासियों के मूल और पारगमन देशों के साथ गहन सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि तस्करी और मानव व्यापार के नेटवर्कों को उनके शुरुआती चरण में ही समाप्त किया जा सके।

घोषणा में कहा गया कि राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक अवसरों और सतत विकास को बढ़ावा देकर उन परिस्थितियों में सुधार किया जा सकता है, जो लोगों को अपने देश छोड़ने के लिए विवश करती हैं। इससे लोगों को अपने ही देशों में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

जी-7 देशों ने यह भी दोहराया कि प्रत्येक राष्ट्र का दायित्व है कि वह अपने नागरिकों को वापस स्वीकार करे। नेताओं ने ऐसे लोगों की सुरक्षित, कानूनी, समयबद्ध और सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रभावी तंत्र विकसित करने का आह्वान किया, जिन्हें किसी अन्य देश में रहने का वैध अधिकार प्राप्त नहीं है।

राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र और कानूनी व्यवस्थाओं का सम्मान करते हुए नेताओं ने स्वीकार किया कि कुछ जी-7 सदस्य देश अनियमित प्रवासन की चुनौतियों से निपटने और प्रवासन प्रबंधन को मजबूत करने के लिए तीसरे देशों के साथ नए कानूनी समझौतों की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं।

मानव तस्करी और अवैध प्रवासन पर यह घोषणा जी-7 शिखर सम्मेलन के व्यापक एजेंडे का हिस्सा है, जिसमें वैश्विक सुरक्षा, भू-राजनीतिक संघर्षों, संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, ऊर्जा सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles