संयुक्त राष्ट्र: भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में मानवाधिकारों के मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका संवाद, क्षमता निर्माण और वास्तविक साझेदारी है। इन्हें राजनीतिकरण, भेदभावपूर्ण रवैये और दोहरे मापदंडों का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार परिषद की विश्वसनीयता निष्पक्षता और सभी देशों के प्रति समान व्यवहार पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा कि संबंधित देश की भागीदारी और सहमति के बिना उस देश को लेकर विशेष जांच या अलग-अलग जनादेश निर्धारित करने से जमीनी स्तर पर बहुत कम सुधार होता है। इसके बजाय इससे परिषद के भीतर मतभेद और विभाजन बढ़ सकते हैं।
भारत ने इस संदर्भ में यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू (UPR) को अधिक उपयुक्त मंच बताया। यह व्यवस्था सभी सदस्य देशों के साथ समान व्यवहार, सहयोग और संवाद पर आधारित है।
आतंकवाद को मानवाधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताया
भारत ने आतंकवाद को मानवाधिकारों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताते हुए कहा कि इससे सबसे पहले जीवन जीने के अधिकार पर हमला होता है। भारत ने मानवाधिकार परिषद से आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति के तहत लगातार ध्यान देने का आग्रह किया।
विकास और सामाजिक अधिकारों पर भी समान ध्यान देने की मांग
भारत ने कहा कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों के साथ विकास के अधिकार को भी नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के समान महत्व मिलना चाहिए। विकासशील देशों में गरीबी, कर्ज और वित्तीय संसाधनों तथा तकनीक तक सीमित पहुंच मानवाधिकारों के वास्तविक लाभ में बड़ी बाधाएं हैं।
भारत ने स्पष्ट किया कि इन चुनौतियों का समाधान अंतरराष्ट्रीय सहयोग से होना चाहिए, न कि दबाव और जबरदस्ती से।
भारत ने मानवाधिकार परिषद के कामकाज में पारदर्शिता, पर्याप्त बजट और संसाधनों के उचित उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही कहा कि मानवाधिकारों से जुड़े कार्यक्रमों में दोहराव से बचने और सभी देशों के लिए समान मानदंड अपनाने की जरूरत है।
भारत का संदेश स्पष्ट रहा कि मानवाधिकारों की रक्षा किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि निष्पक्षता, सहयोग, संवाद और सभी देशों के प्रति समान दृष्टिकोण के आधार पर होनी चाहिए।









